संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा

Updated Fri, 15 Sep 2023 11:04 PM IST

कासगंज। जिला अस्पताल 100 शैय्या का अस्पताल है, लेकिन 7 वर्ष बीतने के बाद भी जिला चिकित्सालय में संपूर्ण चिकित्सा की व्यवस्था नहीं हो पाई है। प्रतिमाह जिला चिकित्सालय से 150 से 200 मरीज चिकित्सा के लिए बाहर रेफर किए जाते हैं। दुर्घटना के घायलों को भी पर्याप्त इलाज नहीं मिल पाता। जिला अस्पताल में ट्रॉमा सेंटर बनाने की योजना भी खटाई में है। अरसे से चिकित्सा विशेषज्ञों की कमी जिला अस्पताल में बनी हुई है। ऐसी स्थिति में मरीज परेशान होते हैं। बुखार की महामारी के बीच डेंगू आदि के गंभीर मरीजों को भी यहां चिकित्सा नहीं मिल पाती।

प्रतिदिन ही जिला अस्पताल पर विभिन्न आपराधिक वारदातों, दुर्घटनाओं आदि के शिकार पहुंचते हैं। इन्हें केवल प्राथमिक उपचार ही आपातकालीन सेवाओं के रूप में मिल पाता है। हैडइंजरी के शिकार हुए लोगों को भी कोई उपचार की सुविधा नहीं मिल पाती। केवल सामान्य मरीज ही यहां के आपातकाल वार्ड में भर्ती किए जाते हैं। ओपीडी ही जिला अस्पताल में संचालित हो पाती है। प्रसव की व्यवस्था जिला अस्पताल पर उपलब्ध रहती है। अगस्त माह में जिला चिकित्सालय से 148 मरीजों को रेफर किया गया। लगभग 100 दुर्घटनाओं के घायल थे, जबकि अन्य आपराधिक वारदातों के शिकार व बीमारियों व बुखार से ग्रसित थे। जिला अस्पताल में मरीजों को पर्याप्त नहीं मिलने से दिक्कतें होती हैं।

जिला अस्पताल में चिकित्सकों के 34 पद हैं, लेकिन इन 34 पदों के सापेक्ष 13 शिक्षक ही तैनात हैं। चिकित्सकों की काफी कमी है। पैरामेडिकल स्टाफ भी कम है। यह स्थिति जिले के लिए चिंताजनक है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से रेफर होकर आने वाले मरीजों का भी यहां इलाज नहीं हो पाता। उन्हें यहां से भी रेफर कर दिया जाता है।



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