कासगंज। जिले के पटियाली तहसील क्षेत्र के गांव बरौना में रौद्र रूप लिए गंगा की धारा लगातार आबादी में कटान करती जा रही है। अभी तक कच्चे मकान और झोपड़ी गंगा में समाई, लेकिन अब पक्का मकान भी गंगा में समाने लगा है। ग्रामीण गंगा के रौद्र रूप को देखकर परेशान हैं। कटान की गति तीव्र बनी हुई है। पिछले 24 घंटे में 8 से 10 मीटर तक गांव में कटान हो गया है। पक्के मकान को कटान से बचाने के लिए जो कटान रोधी कार्य किया गया था वह भी गंगा में समा गया।

परेशान ग्रामीण अपने आशियाने छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करने लगे हैं। गंगा के रौद्र रूप देखते हुए ग्रामीणों की नींद उड़ी हुई है वे लगातार कटान पर नजर रख रहे हैं। बुधवार को कटान की तीव्रता बनी रही। सिंचाई विभाग के द्वारा मनरेगा कर्मी लगाकर कराए जा रहे कार्य नाकाफी साबित हो रहे हैं। सिंचाई विभाग के द्वारा युद्ध स्तर पर कार्य नहीं कराए गए तो गांव के पूर्व से पश्चिम की आबादी के आशियाने कटान की भेंट चढ़ जाएंगे। गंगा के कटान में अब प्रेमपाल, पोखपाल, लालाराम, सूरजपाल, भेद सिंह, रामफूल, महेंद्र, रूप सिंह के कच्चे मकान, झोपडिय़ां आदि कटान की भेंट चढ़ गए हैं। वहीं अब प्रेमराज का पक्का मकान कटान के निशाने पर है। सुबह के समय मकान की दीवार के नीचे से मिट्टी कटने लगी। इसके बाद कटान रोकने के लिए काफी कोशिश की गई, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। बुधवार दोपहर 2 बजे मकान की दीवार गिरनी शुरू हो गई। एक के बाद एक मकान की दीवार व अन्य हिस्से भी गंगा में समाने लगे। यह देखकर ग्रामीण बेहद परेशान हो गए। क्योंकि ग्रामीणों को उम्मीद थी कि मक्का पक्का होने के कारण गंगा के पानी का प्रभाव इतना नहीं आएगा, लेकिन गंगा की रौद्र लहरों ने पक्के मकान को भी कटान का शिकार बना लिया। लगातार कटान हो रहा है। प्रेमराज के मकान के बाद महेंद्र, कुंवर पाल सहित अन्य ग्रामीणों के मकान भी हैं जो कटान की जद में आ जाएंगे। इन ग्रामीणों ने अपने मकान खाली कर दिए हैं और सुरक्षित स्थानों पर सामान भेजकर पलायन शुरू किया है। स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। परेशान ग्रामीणों को कोई रास्ता दिखाई नहीं दे रहा। पूरे गांव में अफरा तफरी का माहौल बना हुआ है। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि पप्पू बघेल ने बताया कि गांव में लगातार स्थिति खराब हो रही है। वहीं ग्रामीण कुंवरपाल ने बताया कि गांव में कटान पूर्व से पश्चिम की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की जमीनें पहले ही गंगा में कट चुकी हैं। जैसे तैसे आशियाने बचे थे वे भी कटान की चपेट में आ गए हैं।

– मैंने खेत बेचकर अपना मकान बनवाया था। यह मकान गंगा से काफी दूर था, लेकिन गंगा का कटान नहीं रुका। अब पूरा पक्का मकान कटता जा रहा है। काफी हिस्सा कट चुका है। परिवार को अब झोपड़ी का सहारा लेना पड़ रहा है। पक्के मकान का सपना टूट गया- प्रेमराज, बरौना।

– हमारा कच्चा मकान कटान में चला गया। अभी तक शासन प्रशासन ने कोई सुध नहीं ली है। न कटान रुक रहा है और न ही कोई राहत मिली है- मुन्नी देवी, बरौना।

– गंगा ने रौद्र रूप अपना लिया है। सब कुछ गंगा में समाता जा रहा है। स्थिति लगातार खराब हो रही है। सिंचाई विभाग भी कटान नहीं रोक पा रहा- कौशल्या।



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