दहेज की मांग पूरी न होने पर विवाहिता की फांसी लगाकर हत्या के मामले में अदालत ने पति को दोषी करार देते हुए सात साल की कठोर कारावास और सात हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। वहीं, ठोस सबूतों के अभाव में मृतका के सास-ससुर को बरी कर दिया गया है। यह फैसला एडीजे-30 कुंदन किशोर सिंह ने सुनाया।

थाना लोहामंडी क्षेत्र के नौबस्ता निवासी मोनू को अदालत ने पत्नी नीतू की हत्या का दोषी माना है। थाना सिकंदरा क्षेत्र के गांव अरतौनी निवासी मुकेश ने तहरीर देकर आरोप लगाया कि बेटी नीतू की शादी 2018 में मोनू के साथ की थी। शादी के बाद से ही ससुराल वाले नीतू से नाखुश थे और अतिरिक्त दहेज के रूप में बाइक की मांग करने लगे थे। विरोध करने पर नीतू को प्रताड़ित किया जाता था। उन्होंने कई बार दामाद और अन्य ससुराल वालों को समझाने का प्रयास किया लेकिन उत्पीड़न का सिलसिला नहीं थमा। 15 जनवरी 2020 को नीतू को फांसी के फंदे पर लटकाकर उसकी हत्या कर दी। पुलिस ने मृतका के पति मोनू, सास मीना देवी, ससुर जवाहर सिंह, देवर रवि, राहुल और ननद ममता के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी।

जांच में सामने आए तथ्य और अदालत का फैसला

मामले की विवेचना सीओ नम्रता श्रीवास्तव ने की। जांच के दौरान देवर रवि, राहुल और ननद का नाम गलत पाए जाने पर उन्हें हटा दिया गया। पति और सास-ससुर के खिलाफ 7 अप्रैल 2020 को अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया गया था। अदालत ने सुनवाई के दौरान पाया कि सास-ससुर के खिलाफ पर्याप्त और ठोस सबूत पेश नहीं किए जा सके, जिसके चलते उन्हें बरी कर दिया गया। वहीं, पति मोनू के खिलाफ पर्याप्त सबूत मिलने पर उसे दोषी ठहराया गया और सजा सुनाई गई।

 



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