कासगंज। इस बार रवि एवं ध्वज योग में गणपत्ति बप्पा की मूर्तियां स्थापित की जाएंगी। स्वाती नक्षत्र, एवं विशाखा नक्षत्र का भी इस बार संयोग बन रहा है, ज्योतिष इन योगों को काफी शुभ मान रहे हैं। इस दौरान गणेश जी की उपासना करने वालों को धन धान्य की प्राप्ति होगी। गणेश चतुर्थी का त्योहार गणेश जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है।इसी दिन से 10 दिन तक चलने वाले गणेश उत्सव की शुरुआत होती है। गणपति रिद्धि सिद्धि और शुभ लाभ के स्वामी हैं। उनकी पूजा से घर परिवार में सुख समृद्धि आती है। ज्योतिष की मानें पर्व पर इस बार सुबह 06 बजकर 08 मिनट से रवि योग बन रहा है यह योग दोपहर 01 बजकर 48 मिनट पर खत्म होगा। पूजा के लिए इस योग को काफी शुभ माना गया है। इस अवधि में स्वाति नक्षत्र का संयोग भी बन रहा है। स्वाति नक्षत्र होेने से केतु योग बनता है। केतु पताका को ध्वज भी कहते हैँ। इसके बाद दोपहर 01:48 बजे से विशाखा नक्षत्र लग जाएगा। यह नक्षत्र रात्रि 2:27 बजे तक रहेगा।

ऐसे करें गणपति पूजा

– शुभ मुहूर्त को ध्यान में रखकर घर के उत्तर भाग, पूर्व भाग, अथवा पूर्वोत्तर भाग में गणेश जी की प्रतिमा रखें।

– फिर पूजन सामग्री लेकर शुद्ध आसन पर बैठें।

– सर्वप्रथम गणेश जी को चौकी पर विराजमान करें और नवग्रह, षोडश मातृका आदि बनाएं।

– चौकी के पूर्व भाग में कलश रखें और दक्षिण पूर्व में दीया जलाएं।

– अपने ऊपर जल छिड़कते हुए ॐ पुण्डरीकाक्षाय नमः कहते हुए भगवान गणेश को प्रणाम करें और तीन बार आचमन करें तथा माथे पर तिलक लगाएं।

– हाथ में गंध अक्षत और पुष्प लें और दिए गए मंत्र को पढ़कर गणेश जी का ध्यान करें। उन्हें आह्वान और आसन भी प्रदान करें।

– पूजा के आरंभ से लेकर अंत तक अ ॐ श्रीगणेशाय नमः। ॐ गं गणपतये नमः मंत्र का जाप अनवरत करते रहें।

– आसन के बाद गणेश जी को स्नान कराएं। पंचामृत हो तो और भी अच्छा रहेगा और नहीं हो तो शुद्ध जल से स्नान कराएं।

– उसके बाद वस्त्र, जनेऊ, चंदन, अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य, फल आदि जो भी संभव यथाशक्ति उपलब्ध हो उसे चढ़ाएं।

– आखिर में गणेश जी की आरती करें और मनोकामना पूर्ति के लिए आशीर्वाद मांगे।

– गणेश चतुर्थी पर्व पर इस बार विशेष योग बन रहे हैं। इससे गणेश जी की भक्तों पर विशेष कृपा रहेगी। – मुकुंद बल्लभ भट्ट, ज्योतिषाचार्य



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