आगरा। संयुक्त शिक्षा निदेशक (जेडी) आरपी शर्मा के समर्थन में कई शिक्षक और कर्मचारी संगठन खड़े हो गए हैं। इसकी पीछे की वजह शिकायतकर्ता शिक्षक अजय पाल का विवादों में घिरा रहना माना जा रहा है। पिछले तीन साल से एकदम से वह सुर्खियों में आया। बोर्ड परीक्षा के दौरान कई स्कूल प्रबंधकों ने उत्पीड़न करने का आरोप भी लगाया था।

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सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य ओमप्रकाश की शिकायत पर शिक्षक अजय पाल सिंह के खिलाफ जांच चल रही है। शिक्षक का विवादों से पुराना नाता रहा है। तत्कालीन डीआईओएस मनोज कुमार के समय सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य ओमप्रकाश शर्मा का विवाद राजकीय इंटर कॉलेज में हुआ था। तब उनकी तरफ से डीआईओएस मनोज कुमार और शिक्षक अजय पाल के खिलाफ मारपीट का मुकदमा थाना शाहगंज में दर्ज कराया गया था। इसके बाद उन्होंने शिकायतकर्ता शिक्षक की फर्जी डिग्री और नियुक्ति समाप्त होने के बाद वेतन प्रदान करने की शिकायत शासन और संयुक्त शिक्षा निदेशक से की थी। यह मामला विधान परिषद की आश्वासन समिति तक पहुंच गया। शासन के निर्देश पर जेडी को जांच दी गई।

फर्जी डिग्री के साक्ष्य मिलने पर जेडी की तरफ से डीआईओएस को अप्रैल माह से पत्र भेजे गए और वेतन का भुगतान व मानव संपदा का महत्वपूर्ण पटल देने पर जानकारी मांगी गई। जबकि शिक्षक अजय पाल लिखित में डीआई्ओएस कार्यालय से अटैच नहीं था। पूर्व डीआईओएस स्व.दिनेश कुमार के कार्यकाल तक वेतन जारी होता रहा लेकिन जुलाई माह में वेतन रोक दिया गया। दूसरी तरफ जेडी आरपी शर्मा का ढाई साल का कार्यकाल विवादों से दूर रहा है। इस वजह से प्रधानाचार्य, शिक्षक और कर्मचारी संगठन उनके पक्ष में खड़े नजर आ रहे हैं।

विद्यालय से सूची में कटकर आता है नाम

शिक्षक अजय पाल सिंह का नाम विद्यालय की वेतन सूची में कटकर आता है। डीसी वैदिक इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्य गुंजन आर्य का कहना है कि अजय पाल की नियुक्ति न्यायालय ने समाप्त कर दी थी। उनके स्तर से कई बार डीआईओएस कार्यालय से शिकायत की गई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। किसी शिक्षक की विद्यालय में उपस्थिति दर्ज नहीं हो रही, तो वेतन कैसे जारी किया जा सकता है।

सोशल मीडिया पर वायरल की डिग्री

सोशल मीडिया पर शिकायतकर्ता शिक्षक की डिग्री और अन्य दूसरे कागजों को वायरल किया जा रहा है। शिक्षकों की तरफ से लगातार विरोध में टिप्पणी की जा रही हैं। इस वजह से भी माहौल संयुक्त शिक्षा निदेशक के पक्ष में बना हुआ है और शिक्षक व कर्मचारी संगठन विजिलेंस की कार्रवाई को गलत बता रहे हैं।

शिक्षक तो मोहरा, मास्टर माइंड कोई और

जिला विद्यालय निरीक्षक और संयुक्त शिक्षा निदेशक कार्यालय के कर्मचारियों में मंगलवार को विजिलेंस कार्रवाई का खौफ बना रहा। कई कर्मचारी अपनी कुर्सियों पर बैठने से बचते नजर आए। कर्मचारियों में यह चर्चा बनी रही कि शिक्षक तो मोहरा है, खेल के पीछे मास्टर माइंड कोई और है। इस मामले को कर्मचारी 41 फर्जी नियुक्तियों से जोड़ रहे हैं, जिसमें एडी बेसिक विभाग के एक कर्मचारी का नाम भी सामने आ रहा है। कर्मचारियों का मानना है कि जेडी की वजह से फर्जी नियुक्तियों का वेतन जारी नहीं हो रहा है। इसलिए उनको हटाने के लिए यह साजिश रची गई।



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