आगरा के जिला अस्पताल में सेंट्रल लैब सालभर में भी शुरू नहीं हो पाई है। इससे मरीजों को परेशानी हो रही है। इसके बनने से बायोकेमेस्ट्री और माइक्रोबायोलॉजी संबंधित 120 तरह की जांचों की सुविधा और बढ़ जाती। अभी यो जांचें मरीजों को निजी लैब में कराना पड़ रहा है।

जिला अस्पताल में 85 लाख रुपए से सेंट्रल लैब बनाने का कार्य बीते साल शुरू हुआ। यह ओपीडी की नई बिल्डिंग तीसरी मंजिल पर बनाई जा ही है। इसी लैब में पैथोलॉजी विभाग को भी शिफ्ट होना है। इस तरह से मरीजों को करीब 300 तरह की जांचों की सुविधा मिल सकेगी। अभी बायोकेमेस्ट्री और माइक्रोबायोलॉजी से जुड़ी बीमारियों की जांचें जिला अस्पताल में नहीं हो रही हैं। इससे मरीजों को परेशानी हो रही है। मरीजों को प्राइवेट लैब में जांच करानी पड़ रही हैं। ये जांचें काफी महंगी है।

प्रमुख अधीक्षक डॉ. राजेंद्र कुमार अरोड़ा ने बताया कि बीते सप्ताह एनएचएम की टीम ने भवन का निरीक्षण कर इसमें कुछ और बदलाव बताए हैं। इनको कार्यदायी संस्था को जल्द पूरा करने के लिए निर्देशित कर दिया है। इस बाबत प्रशासन को भी अवगत करा दिया है। अभी पैथोलॉजी विभाग में 170 तरह की जांच की सुविधा मिल रही है। सीएमओ डॉ. अरुण श्रीवास्तव का कहना है कि लैब बनने के बाद शासन से मशीनें आएंगी, जिनको एक ही भवन में स्थापित किया जाएगा। इससे मरीजों के लिए सुविधाएं बढ़ जाएंगी। कार्यदायी संस्था को भी जल्द कार्य पूरा करने के लिए कहा है।

डीएम ने भी जल्द कार्य पूरा करने के दिए थे निर्देश

बीते महीने डीएम अरविंद मल्ल्प्पा बंगारी ने जिला अस्पताल का निरीक्षण किया था। इसमें इंटीग्रेटेड लैब शुरू नहीं होने की शिकायत मिली थी। उन्होंने प्रमुख अधीक्षक से इस बाबत जानकारी की, जिसमें लैब के लिए जरूरी कार्य पूरा नहीं होने की जानकारी दी। इस पर डीएम ने कार्यदायी संस्था को जल्द कार्य पूरा करने के लिए निर्देशित किया था।

 



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