Agreement to spread the importance of Ramayana to the masses

नृत्य गोपाल दास को एमओयू की प्रति देतीं कुलपति मांडवी सिंह।

लखनऊ। रामायण मेला समिति और भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय के बीच एक एमओयू अयोध्या स्थित मणिराम दास छावनी में किया गया। इसके तहत दोनों संस्थान मिलकर संगीत, नृत्य, नाट्य और साहित्य के माध्यम से रामायण की महत्ता को जन-जन तक पहुंचाएंगे। संयुक्त रूप से रामायण व संबंधित विषयों पर गुणवत्तापूर्ण शोध पत्रिका का प्रकाशन भी करेंगे।

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रामायण मेला समिति की ओर से कार्यकारी महामंत्री कमलेश सिंह और भातखंडे संस्कृत विश्वविद्यालय की ओर से कुलसचिव सृष्टि धवन ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर भातखंडे की कुलपति प्रो. मांडवी सिंह ने हस्ताक्षर काॅपी को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र एवं रामायण मेला समिति के अध्यक्ष श्री महंत नृत्य गोपाल दास को सौंपा।

प्रो. मांडवी सिंह ने बताया कि अयोध्या और अवध की विलुप्त हो रही लोककला, लोकनृत्य, लोकगीत, लोक संस्कार व लोक परंपराओं का संरक्षण व संकलन के लिए संयुक्त रूप से प्रयास किया जाएगा। अयोध्या में होने वाले प्रमुख धार्मिक व सांस्कृतिक उत्सवों का एक कैलेंडर जारी होगा। यहां होने वाली रामलीला को विश्वस्तरीय मंच पर प्रस्तुति के लिए विवि व महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा।

आईसीसी व संगीत नाट्य अकादमी आदि के माध्यम से भारत समेत अन्य देशों के मंचों पर प्रदर्शन के लिए प्रयास किया जाएगा। शिक्षक एवं छात्र विकास लिए संयुक्त रूप से विभिन्न कलाओं के माध्यम से कौशल विकास व मानवीय मूल्यों के अवसर सुनिश्चित किए जाएंगे। इस मौके पर एसएन सिंह, शिवेश्वर पति त्रिपाठी (शरद जी), श्री निवास शास्त्री, सरदार सुरिंदर सिंह (नीटू), उमेश श्रीवास्तव व आशीष मिश्र आदि मौजूद रहे।

मील का पत्थर साबित होगा यह करार

इस अवसर पर मौजूद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महामंत्री चंपत राय ने बताया कि यह करार अयोध्या के विकास में मील का पत्थर साबित होगा। कहा, 200 किलोमीटर के क्षेत्र में जितने भी विद्यालय व विश्वविद्यालय हों, उनको मिलाकर एक शोधपरक पत्रिका का संपादन किया जाए जिसमें विद्वानों के विचार शामिल किए जाएं।

अयोध्या नगर के महापौर महंत गिरीश पति त्रिपाठी ने बताया कि समझौते में सबसे प्रमुख बिंदु यह है कि श्री राम भारतीय कला केंद्र दिल्ली की तर्ज पर अयोध्या में एक श्रीरामलला केंद्र की स्थापना होनी है। इसके तहत अयोध्या में आने वाले तीर्थ यात्रियों को दो से तीन घंटे का एक मंच प्रदान किया जाएगा जो पर्यटन के क्षेत्र में एक नई उपलब्धि होगी।



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