लखनऊ। लखनऊ भले ही राजधानी हो पर यहां के ज्यादातर अनुदानित कॉलेज विद्यार्थियों का मन नहीं मोह पा रहे हैं। वहीं पड़ोसी जनपदों के अनुदानित कॉलेज दाखिले के मामले में यहां से काफी बेहतर हैं। इनके मुकाबले राजधानी के कई अनुदानित कॉलेजों में छात्र संख्या 500 का आंकड़ा भी नहीं छू पा रही है।

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राजधानी होने के नाते लखनऊ में पड़ोसी जनपदों के मुकाबले कहीं अधिक अनुदानित कॉलेज हैं। लखनऊ में अनुदानित कॉलेजों की संख्या 21 है तो वहीं इसकी सीमा क्षेत्र वाले चार जनपदों में कुल मिलाकर अनुदानित कॉलेजों की संख्या महज 15 है। राजकीय डिग्री कॉलेज के मामले में पड़ोसी जनपदों की स्थिति इससे थोड़ी बेहतर है। राजधानी में जहां दीनदयाल उपाध्याय, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, राजकीय महामाया और राजकीय बिजली पासी डिग्री कॉलेज के रूप में चार राजकीय महाविद्यालय हैं। वहीं दूसरी ओर हरदोई में तीन, लखीमपुर में एक, रायबरेली में तीन और सीतापुर में तीन राजकीय डिग्री कॉलेज हैं।

लविवि परिसर के बाद बीए में सबसे ज्यादा छात्र लखीमपुर के कॉलेज में

लखनऊ विश्वविद्यालय में इस समय बीए की करीब दो हजार सीटें हैं। वहीं लखीमपुर के वाईडीपीजी कॉलेज में 1200 से ज्यादा सीटें हैं। यहां सत्र 2021-22, 2022-23 और 2023-24 के दौरान हर साल सिर्फ बीए में ही 1200 से ज्यादा दाखिले हुए हैं। सत्र 2021-22 में 1259, 2022-23 में 1251 और 2023-24 में 1271 दाखिले हुए हैं। इसके अलावा सीतापुर के आरएमपीजी कॉलेज में भी तीन साल के दौरान एक बार बीए में एक हजार दाखिलों का आंकड़ा पार हुआ। यहां सत्र 2021-22 में 1003, 2022-23 में 880 और 2023-24 में 638 दाखिले हुए।

पड़ोसी जिलों के कुछ अनुदानित कॉलेजों में दाखिले की स्थिति

कॉलेज- कोर्स- सत्र 2021-22, 2022-23, 2023-24

सीएसएन कॉलेज, हरदोई – बीए- 533, 624, 464

वाईपीडी कॉलेज, लखीमपुर- बीएससी- 466, 492, 528

सीजीएन कॉलेज, लखीमपुर- बीए- 940, 929, 901

फिरोज गांधी कॉलेज, रायबरेली- बीए- 748, 723, 699

फिरोज गांधी कॉलेज, रायबरेली- बीएससी- 349, 362, 337

कोट-

राजधानी में अनुदानित कॉलेजों की संख्या ज्यादा होने के साथ ही निजी महाविद्यालयों की संख्या भी ज्यादा है। इसकी वजह से पड़ोसी जनपद के मुकाबले राजधानी के अनुदानित कॉलेजों में छात्र संख्या कम है।

प्रो. अंशू केडिया, महामंत्री, लखनऊ विश्वविद्यालय सहयुक्त कॉलेज शिक्षक संघ



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