अलीगढ़ में देहलीगेट के कनवरीगंज स्थित दुर्गा महारानी मंदिर से निकलने वाली शोभायात्रा की अनुमति को लेकर संशय के बादल हटते ही 27 मार्च को भक्ति का रंग पूरे शहर पर छा गया। प्रशासन ने परंपरागत तरीके से अब्दुल करीम चाैराहे से निकलने वाली कलश यात्रा व एक डोले को ही शामिल होने की अनुमति दी थी। 

हालांकि काली व जगन्नाथजी की झांकियों को कटरा मोड़ से ही पुलिस ने बैरियर लगाकर रोक दिया। हल्का सा विरोध भी हुआ लेकिन आयोजकों की समझ-बूझ से मामला शांत हो गया। इन झांकियों को दूसरे मार्ग से निकाला गया। पुराने शहर से निकली कलश यात्रा व मां दुर्गा की भव्य शोभायात्रा में श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर नजर आया। कलश यात्रा के दौरान श्रद्धा और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। सिर पर कलश धारण किए महिलाओं और युवतियों की लंबी कतारें भक्ति भाव से सराबोर नजर आईं। रास्ते भर श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर यात्रा का स्वागत किया। जगह-जगह भव्य स्वागत द्वार सजाए गए और भक्तों के लिए जलपान की व्यवस्था भी की गई। 

मां अंबे के जयकारों से वातावरण गूंज उठा और हर ओर श्रद्धा का सैलाब उमड़ पड़ा। भक्ति में लीन श्रद्धालु नृत्य करते हुए यात्रा के साथ आगे बढ़ते रहे। काली के आकर्षक करतबों ने युवाओं में जोश भर दिया, वहीं डीजे बैंडबाजों पर बज रहे भजनों की धुन पर महिलाएं भक्ति में सराबोर दिखीं। इसमें खाटू श्याम, जगन्नाथ, भोलेनाथ, ठाकुरजी महाराज, काली, दुर्गा समेत 20 से अधिक सुंदर झांकियां, 10 से अधिक कालीजी की शोभायात्रा, 15 बैंड व डीजे के अलावा ढोल नगाड़े शामिल थे। 

शोभायात्रा का जगह-जगह पुष्पवर्षा कर स्वागत हुआ और भक्तों ने काली का पूजन किया। भक्तजन बैंडबाजों एवं ढ़ोल की थाप पर झूमते हुए चल रहे थे। माता के जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंजता रहा। श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़ और भक्ति का उत्साह हर किसी पर भारी नजर आया। यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस- प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। भारी मात्रा में आरएएफ, पीएसी के अलावा कई थानों का फोर्स तैनात रहा।  



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