कस्बा खैर पुलिस चौकी के पड़ोस में रहने वाला पेशे से चालक 52 वर्षीय मनोज वर्मा 1 मार्च शाम खुद को आग लगाकर चिल्लाता हुआ पुलिस चौकी में घुस गया। आनन फानन पुलिसकर्मियों ने कंबल डालकर आग बुझाई, लेकिन तब तक वह 80 फीसदी झुलस गया। नाजुक हालत में मनोज को दिल्ली सफदरजंग भेजा गया है। परिवार ने एक गैर जमानती वारंट के लिए पुलिस उत्पीड़न से तंग आकर खुद को आग लगाने का आरोप लगाया है। पुलिस ने जांच में आरोप सिरे से नकारे हैं। कारणों को लेकर जांच की बात कही जा रही है।
घटनाक्रम के अनुसार मोहल्ला उपाध्याय कस्बा चौकी के तीस मीटर दूरी पर रहने वाले मनोज अविवाहित है और पेशे से चालक है। शाम करीब चार बजे वह घर से बाजार में घूमने निकला, तभी अचानक एक रंग की दुकान के पास खड़े होकर उसने हाथ में ली बोतल से खुद पर पेट्रोल डाल लिया। इसके बाद पुरानी तहसील की सीढि़यों पर चढ़ते हुए खुद को आग लगाकर चौकी में घुस गया। अंदर जाकर चबूतरे पर बैठकर जब चीखना शुरू किया और लोगों ने आग की लपटें देखीं तो भगदड़ मच गई। आनन फानन दो पुलिसकर्मियों ने कंबल डालकर आग को बुझाया। पहले उसे सीएचसी खैर, फिर जेएन मेडिकल कॉलेज ले जाया गया। मगर वहां से दिल्ली रेफर कर दिया।
खबर पर एसएसपी, एसपी देहात, सीओ, कोतवाल आदि पहुंच गए। घटनास्थल निरीक्षण के साथ परिवार से बात की। मनोज के बड़े भाई राजेंद्र वर्मा और राजीव सोनी का आरोप है कि 2006 के एससी/एसटी एक्ट के मामले में न्यायालय से जारी गैर-जमानती वारंट को लेकर पुलिस चौकी का स्टाफ उसे लगातार प्रताड़ित कर रहा था, जिससे परेशान होकर उसने यह कदम उठाया है। वहीं मनोज की भाभी मंजू वर्मा ने बताया कि वह शाम करीब 4 बजे घर से निकला था और कुछ ही देर बाद घटना की सूचना मिली। इसे लेकर लोगों ने चौकी पर पहुंचकर नाराजगी भी जताई।
शुरुआत में परिवार की ओर से पुलिस उत्पीड़न का आरोप लगाया गया था। मगर घटना के बाद सीसीटीवी देखने के बाद व अब तक की जांच में पुलिस उत्पीड़न का आरोप निराधार है। यह बात परिवार को भी बताई गई है। फिर भी परिवार के आरोपों व अन्य दोनों पहलुओं पर जांच की जा रही है।-अमृत जैन, एसपी देहात
