अलीगढ़ जनपद में आगामी त्योहारों और धार्मिक परंपराओं को लेकर शुरू हुई जुबानी जंग अब कानूनी और राजनीतिक मोड़ लेती जा रही है। सांसद सतीश गौतम द्वारा लाउडस्पीकर (भोपू) और नुमाइश मैदान में नमाज को लेकर दिए गए विवादित बयानों ने शहर के सांप्रदायिक और राजनीतिक वातावरण में तनाव पैदा कर दिया है। वहीं, इस मसले पर एएमयू छात्र हाईकोर्ट में सांसद के खिलाफ याचिका दायर करेंगे।
जहां एक ओर एआईएमआईएम नेता ने सांसद पर निजी और तीखे प्रहार किए हैं, वहीं दूसरी ओर एएमयू के छात्रों और विपक्षी नेताओं ने सांसद के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। एएमयू छात्रों ने तो यहां तक तंज कसा कि सांसद को राजनीति के बजाय किसी ड्रामा क्लब का हिस्सा बन जाना चाहिए, ताकि उनके बयानों का मनोरंजन के तौर पर उपयोग हो सके।
छात्र इब्राहिम खान ने कहा कि एक जनप्रतिनिधि द्वारा इस तरह की भाषा का प्रयोग उनके पद की गरिमा के विरुद्ध है। छात्रों का कहना है कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है और यहां की खूबसूरती अनेकता में एकता है। सांसद अपने ही क्षेत्र की 20 फीसदी मुस्लिम आबादी की भावनाओं और त्योहारों (रमजान-ईद) को नहीं समझ पा रहे हैं, यह आश्चर्यजनक है। छात्रों ने अब इस मामले को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर करने की तैयारी शुरू कर दी है।
एआईएमआईएम नेता का विवादित पलटवार
विवाद की शुरुआत तब हुई जब एआईएमआईएम नेता यामीन अब्बासी ने नुमाइश मैदान में ईद की नमाज की अनुमति मांगी। इस पर सांसद ने तंज कसते हुए कहा था कि मुसलमान कब्जे वाली जमीन पर नमाज पढ़ें। इस टिप्पणी से भड़के यामीन अब्बासी ने मर्यादा की सीमाएं लांघते हुए सांसद के परिवार पर व्यक्तिगत टिप्पणी कर डाली, जिससे विवाद और गहरा गया है। इसके अलावा भी सांसद के बयान की चहुंओर निंदा हो रही है। बसपा नेता सलमान शाहिद ने कहा कि अलीगढ़ हमेशा से प्यार-मोहब्बत और गंगा-जमुनी तहजीब का शहर रहा है। सांसद द्वारा समाज को बांटने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन नफरत फैलाने वालों का सियासत में कोई स्थान नहीं है।
