Amar Ujala Samvad: Women's era, dream big and get busy in making it come true

अमर उजाला संवाद के मंच पर मौजूद महिला मंत्री
– फोटो : अमर उजाला

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अमर उजाला संवाद के दूसरे दिन उत्तर प्रदेश सरकार में पांचों महिला मंत्री मंच पर थीं। सभी ने महिलाओं से राजनीति में आने का आह्वान किया। मंत्रियों ने कहा कि बड़े सपने देखें, हताश और निराश हुए बिना सपनों को पूरा करने में जुट जाइये, सफलता जरूर मिलेगी। 

महिलाएं राजनीति में आकर ही इसे बेहतर बना सकती हैं : बेबी रानी मौर्य

महिला कल्याण एवं बाल विकास मंत्री बेबीरानी मौर्य ने कहा, महिलाओं को राजनीति में भागीदारी करनी चाहिए। यह चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन राजनीति में कदम रखकर ही इसे बेहतर बनाया जा सकता है। बेबीरानी ने कहा, मेरे सास-ससुर ने हमेशा मदद की है। उन्होंने ही रसोई में काम करने वाली एक गृहिणी को राजनीति में आने के लिए प्रेरित किया। मेरा कहना है कि सपने हमेशा बड़े देखिए। अगर आप अपने काम को पूरी मेहनत और ईमानदारी के साथ करते हैं तो उसका परिणाम जरूर मिलता है। महिला सुरक्षा को लेकर लोगों के दोहरे चरित्र के सवाल पर कहा कि पहले भेदभाव नहीं था। कन्या भ्रूण हत्या नहीं थी। शायद इसीलिए परिवार में 12 बेटियां थीं। हर काम में बेटी को पूजा जाता था।

मोबाइल फोन को लेकर बोलीं कि इसने तमाम परंपराएं खत्म कर दीं। इसे रोकना होगा। पहले हर लड़का किसी लड़की में बहन, बुआ, मौसी देखता था, प्रेम आदि बहुत निजता की बात थी। आज युवा लिव इन में रह रहे हैं। कॉलेज के नाम पर कहीं और जा रहे हैं। मोबाइल अच्छा है, लेकिन अच्छी बात ही सीखें। शेष समय घर और संस्कारों को दें।

महिला कल्याण, बाल विकास एवं पुष्टाहार मंत्री बेबीरानी ने कहा कि महिलाओं की स्थिति में बहुत बदलाव आया है। जिस प्रोफेशन में आगे आना चाहती हैं, कोई रोक नहीं सकता। 

जब तक लक्ष्य निर्धारित नहीं करेंगे, सफलता नहीं मिलेगी : गुलाब देवी

माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गुलाब देवी ने बताया कि 65 वर्ष पहले राजनीति में कदम रखे थे। तब किसी महिला के राजनीति में उतरने की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। जिसके घर-मोहल्ले में किसी ने स्कूल का मुंह न देखा हो, उस दौर में मेरे पिता ने मुझे सपने सच करने के लिए प्रेरित किया। बिजली नहीं थी। तेल की कुप्पी की रोशनी में पढ़कर चेहरा और कापी धुएं से काली हो जाती थी। लेकिन, हार नहीं मानी। प्रवक्ता और प्रिंसिपल बनी फिर राजनीति में कदम रखा। कभी हारी-कभी जीती, लेकिन भाजपा ने हर बार टिकट दिया।

उन्होंने कहा कि जब तक लक्ष्य निर्धारित नही करेंगे, सफलता नहीं मिलेगी। मोबाइल को लेकर कहा कि एक तरफ मोबाइल दुनिया की तस्वीर दिखाता है तो दूसरी तरफ नैतिक पतन का कारण भी है। रजाई के अंदर मोबाइल देखने वाले बच्चे पर नजर रखें। महिलाओं से कहा कि चरित्र ही उनकी ताकत है। लोग क्या कहेंगे की चिंता न करें, कर्मों को सही रखिए। बाकी ऊपर वाले पर छोड़ दीजिए। उन्होंने महिलाओं से कहा कि संस्कार नहीं भूलें। रामचरित मानस और श्रीमदभागवत गीता जरूर पढ़ें। बच्चों को गर्भ में ही संस्कार दें। 

सफल महिला के चरित्र पर सवाल उठाना संस्कारों का अभाव : प्रतिभा शुक्ला 

महिला कल्याण एवं बाल विकास राज्यमंत्री प्रतिभा शुक्ला ने कहा कि भले ही शरीर अलग हो, लेकिन स्त्री व पुरुष दोनों की आत्मा एक है। महिलाओं के लिए राजनीति एक अच्छी जगह है। अगर आप किसी की मदद करना चाहते हैं तो ये एक बहुत अच्छा क्षेत्र है। महिलाओं की सफलता पर उनके चरित्र पर सवाल उठाना संस्कारों का अभाव है।

उन्होंने कहा कि महिलाओं को राजनीति में आना चाहिए। वह कहीं से मजबूर नहीं हैं। राजनीतिक सफर के बारे में बताया कि 2006 में राजनीति में आईं। 2007 में विधायक बनीं। 2012 में 247 वोट से हारी फिर 2017 और 2022 का चुनाव जीता। उन्होंने कहा कि कोई न कोई प्रेरणा होती है जो आपको आगे बढ़ाती है। कहा कि उनके पति का जीवन में बहुत सहयोग रहा है। जीवन के टर्निंग प्वाइंट का किस्सा याद करते हुए उन्होंने कहा कि वह गंगा किनारे गांव में गई थीं। एक बूढ़ी महिला मिली, जिसके पास थोड़ा सा भोजन था। बोली, वोट देंगे तो मुझे खाना दोगी। वो बात छू गई और राजनीति का मिशन बदल गया। उन्होंने कहा। कि जीवन में पैसा जरूरी है, लेकिन हमें रोज एक अच्छा काम जरूर करना चाहिए। हर व्यक्ति के पास संस्कार हैं, लेकिन उसे जगाने की जरूरत है। बनावट की जिंदगी में कुछ भी नही है। कितना अच्छा भी खा लो, पहन लो, उतना अच्छा नहीं लगेगा, बस किसी की आंख का आंसू पोंछ दो तो मन से खुशी होगी। 

मुश्किलें कल भी थीं और आज भी हैं, हमें तैयार रहना होगा : विजय लक्ष्मी 

ग्राम विकास राज्यमंत्री विजय लक्ष्मी गौतम ने कहा कि राजनीति में कठिनाई तो है, लेकिन संभल- संभल कर कदम बढ़ाती रहीं। अब पूरी सरकार महिला सशक्तीकरण के लिए काम कर रही है। समाज में मुश्किलें लड़कों के लिए भी हैं और लड़कियों के लिए भी हैं।

उन्होंने बताया कि 1996 से राजनीति में सक्रिय रूप से प्रवेश किया। तब महिलाएं बाहर निकलती नहीं थीं। मंच पर आने में तो बहुत संकोच करती थीं। बहुत बातें सुनने को मिलती थीं, लेकिन तानों और आधारहीन बातों से कभी डरी नहीं। उनका सामना किया। अपने आचरण और व्यवहार से लोगों की सोच बदली। धीरे धीरे समझ में आया। संभल-संभल कर कदम बढ़ाए। फिर राजनीति में कभी कोई दिक्कत नहीं हुई।

उन्होंने कहा कि कठिनाई हमेशा रहती है। कल भी थी और आज भी है। फिर भी महिलाएं आगे आ रही हैं। गांव में भी महिलाएं अपने कदम बढ़ा रही हैं। जीवन में कठिनाइयां केवल महिलाओं के लिए ही नहीं हैं। लड़कों के लिए भी चुनौतियां हैं, लेकिन वे इसके लिए मानसिक रूप से तैयार रहते हैं। हमें भी तैयार रहना होगा। भविष्य के बारे में कहा कि आज गांव में ज्यादा से ज्यादा बेटियां शिक्षित हों तभी आगे बढ़ेगी। लगातार चलें, लक्ष्य जरूर मिलेगा। 

अपनी पहचान खुद बनानी पड़ेगी, कोई बनाने नहीं आएगा : रजनी तिवारी

उच्च शिक्षा राज्यमंत्री रजनी तिवारी ने कहा कि अपनी पहचान खुद बनानी पड़ेगी। जब तक हम खुद आगे नहीं बढ़ेंगे, हमें कोई आगे बढ़ाने नहीं आएगा। राजनीति में आने के सवाल पर उन्होंने बताया कि 2007 में पति बिलग्राम से विधायक चुने गए थे। उसी वर्ष उनका देहांत हो गया। 2008 में उपचुनाव हुए और वह जीत गईं। 2012 के चुनाव में उन्होंने तय किया कि इमोशन से वोट नहीं लेंगी। काम करके दिखाया और दोबारा जीतीं। 2017 का चुनाव काबिलियत के दम पर जीता। 2022 में अपने अस्तित्व के लिए चुनाव लड़ा। वो भी जीता। उन्होंने फलसफा दिया कि चुनौती आती है, लेकिन लक्ष्य हो तो उसे पाया भी जा सकता है।

रजनी तिवारी ने कहा कि हम कैसी शिक्षा ले रहे हैं, इसका बहुत असर पड़ता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति लाने के लिए प्रधानमंत्री को धन्यवाद देते हुए जोर दिया कि शिक्षा केवल कमाई का साधन न बने। अच्छे संस्कार और मान सम्मान का माध्यम भी बने। युवतियों से कहा कि कोई समस्या आए तो मां-बाप को बताएं। छुपाना भी अपराध है। कहीं कुछ गलत हुआ तो सामना करें। उन्होंने कहा कि हमारे पास ज्ञान और समझ तो है, लेकिन जब चीजें हमारे सामने आती हैं तो पता नहीं, क्या हो जाता है। महिलाओं के राजनीतिक भविष्य पर कहा कि राजनीति में सफल होने के लिए लक्ष्य और जज्बा होना चाहिए। 



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