
मतदान केंद्र के बाहर लगी कतार।
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चुनाव प्रचार बंद होने व मतदान से पहले तक सियासी समीकरण साधने की जद्दोजहद रविवार को पूरे दिन होती रही। दलों के रणनीतिकार दफ्तरों में बैठकर तैयारी में जुटे रहे। क्षेत्रवार, बूथवार रिपोर्ट तैयार कराने के साथ ही सोशल मीडिया पर पार्टी प्रत्याशी के साथ ही अन्य नेताओं ने कमान संभाले रखी।
चुनाव प्रचार थमने के बाद ही वह मौका होता है, जिसमें माहौल करवट लेता है। ऐसे में नेताओं, प्रत्याशियों और पार्टी कार्यकर्ताओं ने माहौल बनाए रखने और दूसरों का खेल बिगाड़ने में पूरी ताकत लगा दी। अमेठी में भी कुछ ऐसा ही चलता रहा। चुनाव प्रचार थमने के बाद उम्मीदवार और कार्यकर्ता क्षेत्र में सक्रिय हो गए।
शनिवार आधी रात और रविवार को पूरे दिन यही सिलसिला चला। इसके लिए किसी ने फोन का सहारा लिया तो किसी ने सोशल मीडिया को माध्यम बनाया। रसूखदार और समाज में अपनी पकड़ रखने वालों के पास नेताओं के फोन घनघनाते रहे। कहीं पर कोई मतदाता सूची को खंगालने के साथ अपने परंपरागत वोट बैंक को मतदान स्थल पर पहुंचाने की रणनीति तैयार करता दिखा, तो कहीं समीकरण तय करने की कवायद चलती रही।
भाजपा कार्यकर्ताओं को मिली 50 मित्रों को फोन करने की जिम्मेदारी
भाजपा से जुड़े सूत्रों का दावा रहा कि उम्मीदवार के पक्ष में बना माहौल कायम रखने के लिए मतदान से पहले तक कोशिश होती रही। अमेठी के भाजपा नेतृत्व ने कार्यकर्ताओं को सक्रिय कर दिया। एक-एक कार्यकर्ता कम से कम अपने 50 मित्रों से फोन पर संपर्क में जुट गए।
कांग्रेस के पुरवा प्रभारी संभाले हैं मोर्चा
मजबूती का दावा करने वाली कांग्रेस और उसके नेता, कार्यकर्ता भी सक्रिय हैं। सभी लोगों को पार्टी हाईकमान से निर्देश हैं कि गांव क्षेत्र के लोग अपने संबंधियों से संपर्क बनाए रखें। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि बूथ अध्यक्षों व पुरवा प्रभारियों को सक्रिय किया गया है।