मुसाफिरखाना (अमेठी)। दिसंबर में शुरू हो रही डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय की परीक्षा अब तीन पालियों में होगी। जहां एक ओर परीक्षार्थियों के सामने समस्या है, वहीं दूसरी ओर डिग्री काॅलेजों के लिए सिर दर्द से कम नहीं है।

ठंड और कोहरे के बीच 75 किमी. दूर से सुबह सात बजे तक पेपर के लिए काॅलेज पहुंचना चुनौती से कम नही है। डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय की सेमेस्टर प्रणाली की परीक्षा आगामी 18 दिसंबर से प्रस्तावित है। परीक्षा फरवरी महीने में समाप्त होगी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रस्तावित परीक्षा को तीन पालियों में करवाने के लिए समय सारिणी जारी कर दी है, जबकि पहले दो पालियों में परीक्षा संपन्न होती थी।

समय सारिणी के मुताबिक, बीए, बीएससी व बीकाम की प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा सुबह आठ बजे से 10 बजे तक होगी। तृतीय सेमेस्टर की परीक्षा 11.30 बजे से 1.30 बजे तक होगी। इसी क्रम में पंचम सेमेस्टर की परीक्षा शाम 3 बजे से 5 बजे के बीच होगी।

क्या है समस्या

– परीक्षा के दिन महाविद्यालय विद्यालय प्रशासन के निर्धारित केंद्र से प्रति दिन सुबह पेपर लेने जाना पड़ता है। दूर दराज के कॉलेज को निर्धारित केंद्र तक पहुंचने के लिए 75 किमी. तक की दूरी तय करनी पड़ती है। आदर्श नगर शुक्ल स्थित श्रीमती दशरथ देवी महाविद्यालय को पेपर लाने अवध विश्वविद्यालय कैंपस जाना पड़ता है। यह दूरी 75 किमी. है।

विद्यालय के कर्मचारी को सुबह चार बजे ही जाना होगा। पांच बजे परीक्षा की समाप्ति पर सीलिंग, पैकिंग में 20 से 25 मिनट लग जाते हैं। यही नहीं, परीक्षा की समाप्ति पर उसी दिन निर्धारित सेंटर पर उत्तर पुस्तिका की पहुंचाने की जिम्मेदारी भी विद्यालय प्रशासन की होती है।

परीक्षार्थियों की समस्या

– अवध विश्वविद्यालय से संबद्ध लगभग सभी कालेजों को परीक्षा केंद्र बनाया जाता है। इन केंद्रों पर विद्यालय में पढ़ने वाली छात्राओं की परीक्षा होती है, जबकि छात्रों को दूसरे सेंटर पर परीक्षा देने के लिए जाना पड़ता है। ये केंद्र आठ किमी से लेकर 15 किमी दूर तक बना दिये जाते हैं। डिग्री काॅलेज में पढ़ने वालों छात्रों में से आज भी अधिकतर बच्चे साइकिल से पढ़ाई करने जाते हैं।

दिसंबर से शुरू हुई परीक्षा 13 फरवरी को खत्म होगी। पांच बजे परीक्षा खत्म होने के बाद बच्चों को अंधेरे में साइकिल से घर लौटना पड़ेगा। सुबह साढ़े सात बजे तक विद्यालय पहुंचने में सुबह छह बजे से पहले ही घर छोड़ना रहेगा। ठंड एवं अंधेरे के चलते बच्चों को भी होने वाली परीक्षा में कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।



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