
संजय गांधी अस्पताल
अमेठी। मुंशीगंज स्थित संजय गांधी अस्पताल बंद होने का असर ब्लड बैंक पर पड़ रहा है। यहां पर संग्रहित 10 यूनिट ब्लड में से पांच यूनिट ब्लड खराब हो गया। ब्लड बैंक में प्रतिदिन 10 से 12 यूनिट, प्रतिमाह दो से ढाई सौ यूनिट ब्लड जरूरतमंद ले जाते थे। अस्पताल बंद होने से शेष बचे खून पर भी संकट मंडरा रहा है।
कोतवाली क्षेत्र मुसाफिरखाना के गांव पांडेय का पुरवा मजरे रामशाहपुर निवासी अनुज शुक्ल की पत्नी दिव्या शुक्ला की मौत के मामले में बीते 18 सितंबर को मुंशीगंज स्थित संजय गांधी अस्पताल का लाइसेंस निलंबित करने के साथ ही इमरजेंसी ओपीडी समेत अन्य सेवाओं पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। अस्पताल में संचालित ब्लड बैंक अपने अस्पताल के साथ सरकारी व निजी अस्पतालों के जरूरतमंदों को सेवाएं उपलब्ध कराता था।
अस्पताल पर प्रतिबंध लगने के बाद ब्लड बैंक में कुल 10 यूनिट ब्लड रखा था। जिसमें रेयर मिलने वाला ओ नेगेटिव ग्रुप का एक यूनिट ब्लड पूर्व में ही एक्सपायर हो गया था। ब्लड बैंक के डॉक्टर साहिल मुराद बताते हैं कि ब्लड की 35 दिन की एक्सपायरी होती है। बताया कि ब्लड बैंक में रखा पांच यूनिट ब्लड खराब हो चुका है। जबकि शेष बचे पांच यूनिट ब्लड में से दो यूनिट ब्लड के भी हिमोलाइज होने के चलते खराब होने का अंदेशा है।
उन्होंने बताया कि चार ब्लड डोनेशन कैंप पहले से प्रस्तावित थे। साथ ही मेगा कैंप का भी संचालन होना था लेकिन, अधर में लटक गया है। ब्लड बैंक का संचालन न होने से क्षेत्र के सरकारी व निजी अस्पतालों के जरूरतमंदों को ब्लड के लिए सुल्तानपुर व अन्य स्थान पर जाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। ऐसे में गंभीर घटनाओं के जरूरतमंदों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
अस्पताल के एडमिन मैनेजर सुरेश सिंह राजपूत ने बताया कि ब्लड बैंक में रखा 5 यूनिट ब्लड खराब हो गया है। बताया कि अस्पताल के ब्लड बैंक में लखनऊ जैसे शहरों में मिलने वाली प्लेटलेट ब्लड कंपोनेंट लाइसेंस मिलने के बाद इस यूनिट का भी संचालन एक सप्ताह में शुरू होना था। जो डेंगू के मरीजों के लिए वरदान साबित होता। जिसमें प्लाज्मा, प्लेटलेट्स, पीआरवीसी आदि की व्यवस्था होती।