फसल को नुकसान पहुंचाने के साथ ही सड़क हादसे की बनी रहती आशंका

रतजगा कर खेतों की रखवाली करने को मजबूर हैं किसान, शिकायत पर नहीं हो रही सुनवाई

संवाद न्यूज एजेंसी

अमेठी। आपदा की मार तो कभी सिस्टम से लाचार किसान किसी तरह मेहनत कर अपनी खून पसीने से फसल को तैयार तो कर लेता है। लेकिन, किसानों की फसल छुट्टा मवेशियों की निवाला बन जाती है। ऐसे में किसानों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। शिकायत के बाद भी जिम्मेदार सुनने को तैयार नहीं है।

जिले में छुट्टा घूम रहे गोवंशों को संरक्षित करने का फरमान शासन की तरफ से दिया गया है। गोवंशों को संरक्षित करने के लिए 111 गोआश्रय केंद्र भी संचालित किए गए हैं। इन गोशालाओं में 16911 छुट्टा मवेशी संरक्षित भी किए गए हैं। इसके बाद भी किसानों को अपनी आलू, मटर, सरसों की फसल को बचाने के लिए रतजगा करने को मजबूर हैं।

वहीं, सड़कों पर टहल रहे मवेशियों से सड़क दुर्घटना होने से भी इंकार नहीं किया जा सकता है। यह सब दूर दराज स्थानों को छोड़ दिया जाए तो जिला मुख्यालय के आस पास के गांवों व राष्ट्रीय राजमार्ग की स्थित है। गौरीगंज शहर से मुंशीगंज तक राजमार्ग पर थोड़ी-थोड़ी दूर पर बड़ी संख्या में रात में मवेशियों को टहलते हुए कभी भी देखा जा सकता है।

गौरीगंज शहर में रहता मवेशियों का जमावड़ा

जिला मुख्यालय पर ही राष्ट्रीय राजमार्ग, जामो रोड, सब्जीमंडी, ओवरब्रिज सहित अन्य स्थानों पर छुट्टा मवेशियों का जमावड़ा रहता है। यह सब तब है जब विभाग अभियान चला रहा है।

खेतों में झुंड के झुंड घूम रहे मवेशी

किसानों ने धान की कटाई शुरू कर दी है। अन्नदाता आलू, मटर, सरसों के साथ ही गेहूं की बोआई भी प्रारंभ कर दिए हैं। खेतों में झुंड के झुंड टहल रहे छुट्टा मवेशियों से फसलों को नुकसान पहुंच रहा है।

किसानों का दर्द

किसान गंगा राम निवासी शाहगढ़ ने बताया कि छुट्टा मवेशियों से दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। रात रात भर जगकर खेतों की रखवाली करनी पड़ती है। शिकायत करने पर भी कोई ध्यान नहीं देता है।

किसान रामतीरथ निवासी बीररामपुर ने बताया कि पहले धान की फसल और अब गेहूं की फसल रखवाली करने की चिंता सता रही है। मवेशी झुंड के झुंड घूम रहे हैं।

किसान कन्हैया निवासी दरपीपुर ने बताया कि छुट्टा पशु खेतों के अलावा सड़कों व चौराहे पर झुंड बनाकर टहलते रहते हैं। जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।

किसान अनुज शुक्ला निवासी माधवपुर ने बताया कि जैसे जैसे धान के फसल की कटाई हो रही है। छुट्टा मवेशी अब सड़कों की तरफ रुख कर लिए हैं। जिससे दुर्घटना होने की संभावना बनी रहती है।

सभी व्यवस्थाएं हैं दुरुस्त

शाहगढ़ विकास क्षेत्र के राजापुर कौहार गोशाला में सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त दिखीं। यहां 105 मवेशियों को संरक्षित किया गया है। केयर टेकर कृष्ण देव मिश्र ने बताया कि 275 क्विंटल भूसा, 63 बोरी पशु आहार, नमक, गुड उपलब्ध है। बताया कि पशुओं को चरी खिलाई जा रही है। बरसीम अंकुरित हो चुकी है। पशु चिकित्सक डाॅ. जीपी पाठक पशुओं को देखभाल के लिए आते हैं।

चलाया जा रहा अभियान

सीवीओ जेपी सिंह ने बताया कि छुट्टा मवेशियों को संरक्षित करने का अभियान लगातार चलाया जा रहा है। अभियान के तहत 13 टीमों की मदद से 952 गोवंशों को संरक्षित कर लिया गया है। गोशालाओं में भी भूसा-चारा पर्याप्त मात्रा में मौजूद है।



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