अमेठी। आपके घर तक पहुंचने वाला दूध नौनिहालों को मजबूत करने की बजाय कमजोर कर रहा है। दूध में पानी की मिलावट का मामला सामने आया है। एफएसडीए की ताजा रिपोर्ट में खुलासा हुआ है। विभाग के सील किए 62 नमूनों में से 75 प्रतिशत नमूने जांच में फेल हो गए हैं। नमूने बड़े पैमाने पर जारी मिलावटखोरी की ओर इशारा कर रहे हैं।
सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन राजेश द्विवेदी ने बताया कि इस वर्ष कुल 57 सैंपल सील किए गए। पिछले साल के 5 सैंपल मिलाकर कुल 62 सैंपल जांच के लिए लैब भेजे गए। इनमें से 47 नमूने जांच में फेल हो गए हैं। दूध में पानी की मिलावट के कारण फैट की मात्रा कम पाई गई है।
15 प्रतिष्ठानों पर 1.85 लाख रुपये का जुर्माना
सहायक आयुक्त ने बताया कि जिन प्रतिष्ठानों के नमूने फेल हुए, सभी के विरुद्ध वाद दायर किया है। इनमें से 15 पर फैसला आया है। न्यायालय के निर्णय के मुताबिक 15 प्रतिष्ठानों पर 1.85 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ जेपी सिंह ने बताया कि जिले में 6 लाख से अधिक गोवंश हैं। इनमें 3 लाख 15 हजार 654 गाय व 3 लाख 42 हजार 664 भैंस शामिल हैं।
मिलावटी दूध से किडनी- लिवर पर असर
मिलावटी दूध नौनिहालों के पाचन तंत्र पर नकारात्मक असर डालता है। बच्चे को दस्त की समस्या हो जाती है। लिवर में सूजन आने के साथ पीलिया होने का खतरा बढ़ जाता है। बताया कि कई बार दूध में यूरिया तक मिला दी जाती है। किडनी पर विपरीत असर पड़ता है। बच्चों को किडनी व लिवर के गंभीर रोग हो जाते हैं। बच्चे को पिलाने वाला दूध मिलावटी न हो, इसकी तस्दीक कर लेनी चाहिए।
– डॉ लईक-उल-जमा
जिला संयुक्त चिकित्सालय के बाल रोग विशेषज्ञ
