
मेराज फाइल फोटो
जगदीशपुर(अमेठी)। मोहब्बतपुर गांव में शादी में शामिल होने गए किशोर की नाबालिग दोस्तों ने चाकू से गला रेतकर हत्या कर दी। बाद में शव को झाड़ी में फेंक दिया। पुलिस की जांच में घटना का कारण मारपीट और गालीगलौज करना निकलकर आया है। मोहब्बतपुर निवासी गांव निवासी रियाज अहमद का 15 वर्षीय पुत्र मेराज गांव के ही दो नाबालिग दोस्तों के साथ रविवार की शाम गांव में ही वैवाहिक आयोजन में गया था। सोमवार की सुबह तक मेराज वापस नहीं आया तो परिजनों ने साथ में गए दोनों दोस्तों से जानकारी ली। उन्होंने जानकारी न होने की बात कही। इसके बाद परिजन दिनभर उसे खोजते रहे।
पता न चलने पर सोमवार शाम को लापता मेराज की मां अजमतुल ने पुलिस को सूचना दी। गुमशुदगी दर्ज कर पुलिस ने मेराज की तलाश शुरू की। मंगलवार की भोर में गांव के पास झाड़ी में मेराज का शव मिला। इसके बाद परिजनों की तहरीर के आधार पर पुलिस ने मेराज के साथ गए दोस्तों से पूछताछ की तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ।
पुलिस ने दावा किया है कि पूछताछ में नाबालिग दोस्तों ने बताया कि मेराज उनके साथ मारपीट करता था, गाली-गलौज करता था। इससे नाराज होकर उसकी चाकू से गोदकर हत्या कर दी। शव को गांव के बाहर झाड़ी में फेंक दिया। इनकी निशानदेही पर पुलिस ने आलाकत्ल बरामद किया। पुलिस दोनों नाबालिगों से पूछताछ कर रही है। एसपी डॉ. इलामारन जी ने बताया कि आरोपी भी नाबालिग बताए जा रहे हैं। गांव में पुलिस बल तैनात किया गया है।
हमारे लाल ने क्या बिगाड़ा था…अमेठी। हमारी तो किसी से दुश्मनी भी नहीं थी, हमारे लाल ने किसी का क्या बिगाड़ा था। यदि पता होता कि हमारा बेटा नहीं लौटेगा तो हम कभी जाने नहीं देती। यह अलफाज मृतक मेराज की मां अजमतुल का था। वह मेराज को याद करके बार-बार बेहोश हो जा रही थी। होश में आने के बाद लोगों से यहीं पूछतीं कि मेराज कहां है।
भाई-बहनों में सबसे छोटा था
मृतक मेराज दस भाई-बहनों के बीच सबसे छोटा था। माता-पिता और दो बहनों को छोड़ कर घर के बाकी सभी सदस्य बाहर रहते हैं। मेराज भी बड़े भाई के साथ अहमदाबाद में रहकर पढ़ाई कर रहा था। मोहर्रम पर घर आया था। दशहरे के बाद उसे वापस जाना था। मेराज की मौत के बाद भाई रिजवान, शहबान, आजाद, इशराक, सेबू खान व मोहसिन तथा बहन नसरूल निशा, रन्नो तथा चांदनी का रो-रोकर हाल बेहाल है।
पिता ने किया था मना
मेराज को जब बुलाने उसके दोनों नाबालिग दोस्त आए थे तो पिता रियाज ने मना किया था। बाद में पुत्र की जिद व मोह में पड़कर उसने जाने दिया। पिता रियाज का रो-रो कर बुरा हाल है कि काश मेराज उसकी बात को मान लिया होता, तो शायद आज यह दिन ना देखना पड़ता। रियाज बताते हैं कि घर से जाते समय उसने मना किया तो मेराज यह कहकर दोस्तों के साथ चला गया कि गांव में ही तो जा रहें हैं यहां भी ना जाएं तो कहा जाएं।
