गौरीगंज में ठहराव न होने से यात्री हो रहे परेशान

ट्रेनें पकड़ने के लिए 13 किमी. दूर अमेठी जाना होता है

संवाद न्यूज एजेंसी

गौरीगंज (अमेठी)। लखनऊ-प्रतापगढ़ रेल ट्रैक पर संचालित 10 जोड़ी ट्रेनें जिला मुख्यालय पर रुके बिना गुजर रही हैं। ऐसे में दैनिक यात्रियों के साथ परदेशियों को असुविधा हो रही है। ट्रेन की यात्रा करने के लिए लोगों को अलग से पैसा खर्च कर अमेठी स्टेशन जाना पड़ता है।

रेल विभाग द्वारा जिला मुख्यालय स्थित रेलवे स्टेशन को आकर्षक बनाने के साथ ही सुविधाओं से लैस किया गया है। तीन प्लेटफाॅर्म वाले स्टेशन पर रेलवे साइडिंग की भी व्यवस्था है। विभाग को रेल साइडिंग से होनी वाली आय प्रति माह पांच से दस करोड़ है। आरक्षित व अनारक्षित टिकट से प्रतिमाह 30 से 40 लाख रुपये की आय होती है। आलम यह कि लखनऊ-रायबरेली-प्रतापगढ़-वाराणसी रेल ट्रैक पर आय के मामले में गौरीगंज रेलवे स्टेशन पहले स्थान पर है।

जिला मुख्यालय होने से प्रतिदिन बड़ी संख्या में दैनिक यात्रियों के साथ परदेशियों का आवागमन होता है। ऐसे में आए दिन लोग ट्रेन से उतरने के लिए चेन पुलिंग करते हैं। एक साल में आरपीएफ ने 35 चेन पुलिंग के केस दर्ज कर कार्रवाई की है। आलम यह है कि ट्रैक पर मुंबई के लिए संचालित अकेली ट्रेन उद्योग नगरी से यात्रा करने के लिए लोगों को 13 किलोमीटर दूर अमेठी जाना पड़ता है। इस ट्रेन से आने पर भी लोगों को अमेठी में उतरकर निजी वाहन या किराए के वाहन से आना पड़ता है।

इसी तरह भोपाल-प्रतापगढ़, राजेंद्र नगर-जम्मूतवी, यशवंतपुर व न्यू यशवंतपुर का भी ठहराव नहीं होने से यात्रियों को असुविधा हो रही है। इतना ही नहीं मालदा टाउन-दिल्ली साप्ताहिक, एकात्मा एक्सप्रेस, हावड़ा-लाल कुआं, हाबड़ा-बीकानेर तथा गरीब रथ का भी मुख्यालय के स्टेशन पर ठहराव नहीं है।

स्थानीय लोगों की मांग पर केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने दो बार डीआरएम को पत्र भेजकर गौरीगंज में ठहराव के लिए कहा था। इसके बावजूद आज तक कुछ नहीं हुआ।

वर्जन

यात्रियों को हो रही असुविधा की जानकारी उच्चाधिकारियों को प्रेषित की है। ट्रेनों के ठहराव का निर्णय उच्च स्तर से होना है।

प्रवीण सिंह, स्टेशन मास्टर



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