जागरूकता अभियान व डोर-टू-डोर संपर्क करने के बाद भी नहीं सुधरे हालात

संवाद न्यूज एजेंसी

अमेठी सिटी। सरकार परिषदीय स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। स्कूल में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए कायाकल्प किया गया है। बच्चों को यूनिफाॅर्म, मुफ्त किताबें और दोपहर का भोजन दिया जा हा है। इसके बावजूद इन स्कूलों में पढ़ने वालों की संख्या तार घटती जा रही है। गत शैक्षिक सत्र से वर्तमान शिक्षा सत्र में ही करीब 33 हजार बच्चे घट गए हैं।

पहले परिषदीय विद्यालयों में संसाधनों की कमी के चलते अभिभावक बच्चों को भेजने से कतराते थे। केंद्र और प्रदेश सरकार विद्यालयों की स्थिति सुधारने में लगी है। ऑपरेशन कायाकल्प के तहत 1570 प्राथमिक, पूर्व माध्यमिक एवं कंपोजिट विद्यालयों के टाइल्स लगाने, रंगाई-पुताई और शौचालय आदि के काम कराए गए हैं। अब तक करीब 1120 विद्यालय के कायाकल्प के सभी 19 काम कराए जा चुके हैं। शिक्षकों की नियुक्ति की गई। विद्यालयों की स्थिति सुधारने से शुरुआत में बच्चों की संख्या में इजाफा हुआ लेकिन धीरे-धीरे संख्या घट रही है।

यह है हकीकत

यू डायस पोर्टल के तीन साल के आंकड़ाें के मुताबिक 2021 में पहली से आठवीं तक के विद्यार्थियों की संख्या दो लाख 38 हजार थी। वर्ष 2022-23 में घटकर दो लाख 05 हजार हो गई। 2023-24 सत्र में यह संख्या एक लाख 67 हजार रह गई है। इस तरह एक साल में ही करीब 33 हजार से अधिक बच्चे घट गए।

मिड डे मिल से लेकर यूनिफॉर्म तक मुफ्त

परिषदीय विद्यालयों के छात्रों को मेन्यू के हिसाब से प्रतिदिन मिड डे मिल उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके साथ ही डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से छात्रों के अभिभावकों के खातों में यूनिफॉर्म के लिए 1200 रुपये भेजे जा रहे हैं। अभिभावक इन रुपयों से छात्रों के लिए बैग, यूनिफाॅर्म, पेन पेंसिल, जूते मोजे के साथ अन्य सामग्री खरीद रहे हैं। स्कूलों में लगातार सुविधाएं बढ़ती जा रही हैं लेकिन छात्र संख्या कम होती जा रही है।

सुधार के लिए हो रहे प्रयास

परिषदीय स्कूलों में अब नामांकन प्रेरणा पोर्टल के माध्यम से हो रहे हैं। पहले एक छात्र का कई जगह नामांकन होता था लेकिन अब यदि किसी जगह पहले से नामांकन होगा तो वह प्रेरणा पोर्टल पर दोबारा दर्ज ही नहीं होगा। फर्जीवाड़े को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है। कोविड काल में महानगरों से आए बच्चों ने पंजीकरण कराया था, लेकिन अब वह नहीं है। जिससे संख्या में कमी आई है। सुधार को लेकर हर संभव प्रयास हो रहा है।

-संजय कुमार तिवारी, बीएसए



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