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अन्नपूर्णा मंदिर का शिखर – फोटो : अमर उजाला
विस्तार
बाबा विश्वनाथ के आंगन में विराजमान मां अन्नपूर्णा के मंदिर की दीवारों की सेहत अब सुधर जाएगी। मंदिर की दीवारों से लाल रंग उतर चुका है और अब चुनार के गुलाब पत्थरों की रंगत निखर उठी है। शिखर से लेकर गर्भगृह की बाहरी दीवारों से रासायनिक रंगों को उतारने के लिए विशेषज्ञों की टीम लगाई गई है।
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बुधवार को अन्नपूर्णा मंदिर के शिखर से लेकर गर्भगृह की दीवारों का रासायनिक रंग उतर गया। कई जगह मंदिर के पत्थर खराब हो चुके हैं। इन पत्थरों को भी बदलने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। मंदिर प्रशासन के अनुसार 50 सालों के बाद मंदिर की दीवारों की सफाई हुई है।
विशेषज्ञों से सलाह लेने के बाद मंदिर के महंत ने मंदिर की दीवारों से रंग हटवाने का निर्णय लिया था। इसके लिए बंगलूरू से 13 लाख रुपये की मशीन मंगाई गई थी। छह दिन से विशेषज्ञों की निगरानी में रोजाना आठ से 10 घंटे 12 से अधिक मजदूर दो शिफ्ट में काम कर रहे हैं। मंदिर की दीवारों पर गोबर से तैयार पेंट लगाया जाएगा।
पेशवा बाजी राव ने कराया था मंदिर का निर्माण
अन्नपूर्णा मंदिर का निर्माण 1729 ई. में मराठा पेशवा बाजी राव ने करवाया था। यह देश का इकलौता मंदिर है जो श्रीयंत्र के आकार का है। इसमें पारंपरिक भारतीय मंदिर वास्तुकला नजर आती है। प्रवेश द्वार में सजावटी मेहराब, मूर्तिकला या नक्काशी की गई है। मंदिर की बाहरी और भीतरी दीवारों पर हिंदू पौराणिक कथाओं, पुष्प आकृतियों और ज्यामितीय पैटर्न से संबंधित दृश्यों को दर्शाती जटिल नक्काशी है। मंदिर को बनाने में नागर शैली की वास्तुकला का इस्तेमाल किया गया है। यहां देवी अन्नपूर्णा की दो मूर्तियां हैं, एक पीतल की और दूसरी सोने की। सोने की मूर्ति साल में एक बार अन्नकूट के दिन और पीतल की मूर्ति के रोज दर्शन होते हैं।