स्वास्थ्य विभाग का हाल : मंडलायुक्त का आदेश भी हुआ बेअसर
पांचवी कड़ी
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। शहर में बेधड़क चल रहे अपंजीकृत पैथोलॉजी सेंटर पर अंकुश लगाने का मंडलायुक्त ने आदेश दिया था मगर स्वास्थ्य विभाग इस पर ठोस कार्रवाई करने से ठिठक रहा है। अवैध रूप से संचालित सेंटरों की जांच करने के बजाय अब विभाग लोगों से अपील कर रहा है कि अपंजीकृत लैब में जांच न कराएं। कोई जांच के लिए भेजता है तो पत्र से अवगत कराएं ताकि कार्रवाई हो। वहीं, तर्क है कि एचपीआर और एचएफआर पर पंजीकरण होने के बाद स्वत: अंकुश लग जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग में शहर में संचालित 80 पैथोलॉजी सेंटर पंजीकृत हैं जबकि 250 से ज्यादा बेधड़क चल रही है। हैरानी इस बात की है कि जिम्मेदार अफसरों ने कभी भी इन लैबों का निरीक्षण करके गुणवत्ता तक परखने की जेहमत नहीं उठाई। इस वजह से इन पैथोलॉजी पर लोगों से मनमाफिक जांच के शुल्क वसूले जा रहे हैं। सरकार ने डेंगू की जांच के लिए 600 रुपये शुल्क तय किए हैं मगर ये लैब एक हजार तो किसी से 800 रुपये लेते हैं। इसको मंडलायुक्त बिमल कुमार दुबे ने गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को कड़ाई से अंकुश लगाने के निर्देश दिए हैं मगर जिम्मेदार अफसर कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति कर रहे हैं। यही वजह है कि चेकिंग के बावजूद अभी तक एक भी अपंजीकृत लैब न पकड़ी जा सकी हैं और न किसी भी कार्रवाई हुई है। पब्लिक हेल्थ ऑफिसर डाॅ. उत्कर्ष राज का कहना है कि जल्द ही एसोसिएशन के साथ बैठक करके तय किया जाएगा कि हर पैथोलॉजी सेंटर अपने यहां सीएमओ कार्यालय का पंजीकरण प्रमाणपत्र लगाएंगे। जनता से अपील है कि जहां सीएमओ कार्यालय का पंजीकरण नहीं मिले, वहां जांच न कराएं। यदि अपंजीकृत लैब है, तो उसकी सूचना गुमनाम पत्र से सीएमओ कार्यालय कर सकते हैं ताकि कार्रवाई हो सके। डॉ. उत्कर्ष का कहना है कि जल्द ही अपंजीकृत पैथोलॉजी सेंटरों पर अंकुश लगाने के लिए कठोर कदम उठाया जाएगा।
15 दिन का देंगे पंजीकरण का समय
डाॅ. उत्कर्ष राज ने बताया कि चेकिंग में मिलने वाली अपंजीकृत लैबों को पंजीकरण के लिए 15 दिन का समय दिया जाएगा। यदि 15 दिन में पंजीकरण नहीं होगा तो संबंधित थाना पुलिस को कार्रवाई के लिए लिखा जाएगा। उन्होंने बताया कि अपंजीकृत पैथोलाॅजी सेंटर और एक-एक डॉक्टर के कई-कई लैब में जांच करने के मामलों पर अंकुश लगाने के लिए सरकार एचपीआर (हेल्थ प्रोफेशनल रजिस्ट्रेशन) तथा एचएफआर (हेल्थ फैसेलिटी रजिस्ट्रेशन) पर पंजीकरण करवा रही है। इन पर पंजीकरण होने के बाद स्वत: इन पर अंकुश लग जाएगा।
