Ardha Kumbh Kumbh Purna Kumbh and Maha Kumbh know what is difference how is calculation done

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Mahakumbh 2025
– फोटो : अमर उजाला

महाकुंभ मेला भारतीय संस्कृति का ऐसा पवित्र उत्सव है, जिसकी गूंज प्राचीन ग्रंथों से लेकर आधुनिक युग तक सुनाई देती है। यह मेला न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि भारतीय दर्शन, परंपरा और खगोलीय विज्ञान का अद्भुत संगम भी है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन से निकले अमृत कलश की बूंदें हरिद्वार, प्रयागराज (इलाहाबाद), उज्जैन और नासिक के पवित्र स्थलों पर गिरीं। यही कारण है कि इन चार स्थानों पर कुंभ मेले का आयोजन होता है।

खगोलीय गणनाओं के आधार पर कुंभ और महाकुंभ का आयोजन अनंत काल से होता रहा है। विष्णु पुराण में इस बात का उल्लेख है कि जब गुरु कुंभ राशि में प्रवेश करता है और सूर्य मेष राशि में होता है, तो हरिद्वार में कुंभ का आयोजन होता है। इसी प्रकार, जब सूर्य और गुरु सिंह राशि में होते हैं, तो नासिक में कुंभ लगता है। उज्जैन में कुंभ तब होता है जब गुरु कुंभ राशि में प्रवेश करता है। प्रयागराज में माघ अमावस्या के दिन सूर्य और चंद्रमा मकर राशि में होते हैं और गुरु मेष राशि में होता है। इस खगोलीय गणना का सटीक पालन आज भी किया जाता है।

 

 




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प्रयागराज, महाकुंभ 2025
– फोटो : अमर उजाला

अर्ध कुंभ

अर्ध कुंभ एक धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन है, जो हर छह साल में हरिद्वार और प्रयागराज में होता है। यह आयोजन गंगा, यमुना और सरस्वती नदियों के संगम पर होता है, जिसे धार्मिक दृष्टि से अत्यधिक पवित्र माना जाता है। अर्ध कुंभ का महत्व इसलिए अधिक है क्योंकि इसे कुंभ मेले का आधा चक्र माना जाता है। इसमें लाखों श्रद्धालु स्नान करने के लिए आते हैं, क्योंकि यह मान्यता है कि इस दौरान संगम में स्नान करने से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसके आयोजन का समय भी खगोलीय गणनाओं पर आधारित होता है। जब बृहस्पति वृश्चिक राशि में और सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है, तब अर्ध कुंभ का आयोजन होता है।

 


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महाकुंभ में डुबकी लगाते श्रद्धालु
– फोटो : पीटीआई

कुंभ मेला

कुंभ मेला दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव है, जो हर 12 साल में चार स्थलों – हरिद्वार, प्रयागराज, उज्जैन और नासिक में आयोजित होता है। इसे भारतीय संस्कृति और आस्था का प्रतीक माना जाता है। कुंभ मेले की पौराणिक कथा समुद्र मंथन से जुड़ी है, जिसमें अमृत कलश के लिए देवताओं और असुरों में संघर्ष हुआ था। इस आयोजन का मुख्य आकर्षण पवित्र नदियों में स्नान है, जिसे अमृत स्नान कहा जाता है।

 


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महाकुंभ मेला क्षेत्र में पांटून पुल पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़
– फोटो : संवाद

पूर्ण कुंभ

पूर्ण कुंभ मेला कुंभ मेले का ही विस्तार है, जो हर 12 साल में प्रयागराज में आयोजित होता है। इसे कुंभ का पूर्ण रूप माना जाता है और इसका महत्व अन्य कुंभ मेलों से अधिक है। पवित्र नदियों गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम पर होने वाले इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य आत्मा की शुद्धि और मोक्ष प्राप्ति है।

 


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महाकुंभ 2025
– फोटो : @MahaaKumbh

महाकुंभ

महाकुंभ मेला भारतीय धार्मिक आयोजनों का सबसे बड़ा पर्व है, जो हर 144 साल में केवल प्रयागराज में आयोजित होता है। इसे कुंभ मेले का सबसे पवित्र और महत्त्वपूर्ण रूप माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इस मेले में संगम पर स्नान करना आत्मा को पवित्र और पापों से मुक्त करता है।

 

 




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