फाल्गुन शुक्ल अष्टमी मंगलवार से होलाष्टक शुरू हो जाएंगे, जो दो मार्च पूर्णिमा पर होलिका दहन के साथ समाप्त होंगे। आचार्य सुबोध शास्त्री के अनुसार, होलाष्टक को लेकर देश में विभिन्न धार्मिक एवं ज्योतिषीय मान्यताएं हैं। होलाष्टक के आठ दिनों को साधना, संयम एवं सतर्कता का समय भी माना जाता है।

उनके अनुसार सभी राशि के जातक होलाष्टक अवधि में भगवान विष्णु एवं भगवान शिव की पूजा करें। इससे ग्रहों का कुप्रभाव नहीं रहेगा। उनके अनुसार, 23 फरवरी को कुंभ राशि में मंगल ने प्रवेश कर लिया है। जबकि सूर्य, शुक्र, राहु एवं बुध पहले से ही कुंभ राशि में हैं। ऐसे में पंचग्रही योग बन गया है। यह योग एक मार्च तक रहेगा।

उनके अनुसार, मेष, वृष, मिथुन, सिंह, कन्या, तुला, धनु, मकर, कुंभ राशि के जातकों को स्वास्थ्य एवं आर्थिक लाभ मिलेगा। जबकि कर्क, वृश्चिक एवं मीन राशि के जातक सावधानी बरतें। इधर, ज्योतिषविद् रजनी दीक्षित के अनुसार, सभी राशि के जातक भगवान शिव का जलाभिषेक एवं हनुमान जी की उपासना करें। जरूरतमंदों को दान करें। सभी को लाभ मिलेगा।



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