दिबियापुर कस्बा स्थित गेस्ट हाउस में शनिवार सुबह उस वक्त खलबली मच गई जब शादी की रस्मों के बीच दुल्हन ने हंगामा शुरू कर दिया। छह फेरे पूरे होने के बाद दुल्हन ने आरोप लगाया कि फेरे उल्टे कराए जा रहे हैं और सातवां फेरा लेने से मना कर दिया। इसके बाद मंडप में सामान फेंका जाने लगा। दूल्हे ने भी दुल्हन की मानसिक स्थिति पर सवाल उठाते हुए शादी से मना कर दिया। पुलिस के समझाने के बाद मामला शांत हुआ और पुलिस की मौजूदगी में सातवीं रस्म पूरी की गई।

फफूंद के काजीपुर निवासी पंकज पुत्र नरेश चंद्र का विवाह दिबियापुर की ईशा के साथ 11 दिसंबर को मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत संपन्न हुआ था। शनिवार को रिश्तेदारों की मौजूदगी में विधिवत विवाह और प्रीतिभोज का कार्यक्रम रखा गया था। रात में जयमाल के बाद सुबह फेरों की रस्म शुरू हुई। मौजूद लोगों के अनुसार छह फेरे शांतिपूर्वक संपन्न हो गए थे। जैसे ही सातवें फेरे की बारी आई, दुल्हन ईशा अचानक भड़क गई। उसने आरोप लगाया कि पंडित जी फेरे उल्टे करवा रहे हैं।

दुल्हन ने गुस्से में आकर मंडप का सामान इधर-उधर फेंकना शुरू कर दिया। दुल्हन का यह रूप देख दूल्हा पंकज भी अड़ गया। उसने कहा कि लड़की का मानसिक संतुलन ठीक नहीं है, ऐसे में वह शादी आगे नहीं बढ़ाएगा। विवाद बढ़ते देख गेस्ट हाउस में अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही कोतवाली से उपनिरीक्षक दिनेश कुमार मौके पर पहुंचे।

पुलिस ने दोनों पक्षों को समझाते हुए कानूनी और सामाजिक पहलुओं का हवाला दिया। जद्दोजहद के बाद सुबह करीब नौ बजे पुलिस की मौजूदगी में सातवां फेरा संपन्न हुआ। थाना प्रभारी रुद्र प्रताप नारायण त्रिपाठी ने बताया कि फेरों को लेकर कुछ गलतफहमी हुई थी, जिससे विवाद बढ़ा। दोनों पक्षों को समझाकर शांत करा दिया गया है। पुलिस की मौजूदगी में विदाई करा दी गई है। अब स्थिति सामान्य है।



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