
लक्ष्मण किला अयोध्या।
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अयोध्या में लक्ष्मण किला एक ऐसा मंदिर है, जहां पर झूठी कसम खाने पर बहुत देर तक झूठ टिक नहीं पाता है। मान्यता है कि इस मंदिर में ऐसी दैवी शक्तियां हैं, जो किसी न किसी रूप में झूठ बोलने वाले को परेशान करती हैं। इससे झूठ बोलने वालों का राज खुल जाता है। लक्ष्मण किला वही स्थान है, जहां श्रीराम के दिए वचन का पालन करते हुए लक्ष्मण जी ने सरयू में अपने शरीर को त्याग दिया था।
इसी स्थान पर लक्ष्मण जी ने अपना शरीर त्याग करते हुए शेषावतार लिया। आचार्य पीठ लक्ष्मण किला मंदिर के अधिकारी सूर्य प्रकाश शरण बताते हैं कि स्वामी युगलानंद शरण महाराज को अंग्रेजों ने जमीन दी थी। जिस पर 1825 में रीवा (मध्यप्रदेश) के दीवान ने भव्य मंदिर बना कर दिया। यही लक्ष्मण किला मंदिर के नाम से प्रसिद्ध हुआ। यह रसिक उपासना की सबसे प्राचीन पीठ है। यहां वह सीता के पति हैं, सखियों के जीजा हैं और जगत के स्वामी हैं।
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हर साल विवाहोत्सव में जनकपुर की सखियां अयोध्या आती हैं और विवाह के गीत गाती हैं। उनकी उपासना में श्रृंगार का भाव प्रमुख है। यहां पर भगवान श्री राम का बाल रूप भी विराजमान हैं। भगवान राम को श्रृंगार के बाद दर्पण दिखाने की प्रथा है। यहां किशोरी जी व लक्ष्मण जी का भी मूर्ति स्थापित है।
