Ayodhya Ram Mandir Proposal for liberation of temple passed in Sugriva Fort meeting

Ram Mandir
– फोटो : Amar Ujala

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दिसंबर 1949 में परिसर में रामलला की मूर्ति मिलने के विवाद और मुकदमे बाजी की शुरुआत होने के वक्त विश्व हिंदू परिषद, भाजपा या उसके पूर्ववर्ती राजनीतिक दल जनसंघ का गठन नहीं हुआ था। 

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जरूर हिंदुत्व के सरोकारों पर जनजागरण का काम कर रहा था। उसके प्रचारक और स्वयंसेवक व्यक्तिगत रूप से अयोध्या मामले पर चिंता तो जताते, लेकिन बतौर संगठन इस मुद्दे पर सक्रिय नहीं थे। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 1975 में आपातकाल लगा दिया। 

विपक्ष के ज्यादातर नेता गिरफ्तार हो गए। इंदिरा को पराजित करने के लिए ज्यादातर विपक्षी दलों ने मिलकर जनता पार्टी बनाई। इसमें संघ की विचारधारा से 1951-52 में निकले जनसंघ के नेता भी थे। संघ से जुड़ाव और नीतियों के कारण उसे हिंदूवादी संगठन माना जाता था। 

जनता पार्टी की सरकार बनने के कुछ दिन बाद ही समाजवादी नेता मधु लिमये ने जनसंघ घटक के नेताओं से संघ से नाता तोड़ने की मांग शुरू कर दी। तर्क था कि जनता पार्टी में शामिल होते वक्त जनसंघ ने संघ से वास्ता न रखने का वादा किया था। अटल बिहारी वाजपेयी जैसे नेताओं के तर्क के बावजूद लिमये नहीं माने, तो जनसंघ ने नाता तोड़ने का फैसला किया। 



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