Ayodhya Ram Mandir Scientifically proved Babri structure was not built on empty space

बाबरी ढांचा विध्वंस के दौरान की फोटो
– फोटो : अमर उजाला

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विवादित स्थल के ग्राउंड पेनेट्रेटिंग सर्वे के बाद विशेषज्ञों ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। इसमें ध्वस्त ढांचे के नीचे बड़े क्षेत्र तक फैले एक विशाल ढांचे के मौजूद होने का उल्लेख किया। कनाडा से आए विशेषज्ञों की रिपोर्ट वैज्ञानिक तौर पर यह साबित करती थी कि बाबरी ढांचा किसी खाली जगह पर नहीं बनाया गया था। 

विशेषज्ञों ने वैज्ञानिक उत्खनन के जरिए जीपीआरएस रिपोर्ट की सत्यता के लिए अपना मंतव्य भी दिया। इस बीच 22 जून वर्ष 2002 में विहिप ने राम मंदिर निर्माण के लिए विवादित भूमि के हस्तांतरण की मांग उठाई। 

जनवरी 2003 में रेडियो तरंगों के जरिए ये पता लगाने की कोशिश की गई कि क्या विवादित रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद परिसर के नीचे किसी प्राचीन इमारत के अवशेष दबे हैं। हालांकि इससे कोई पक्का निष्कर्ष नहीं निकला। मार्च 2003 में तत्कालीन केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से विवादित स्थल पर पूजा-पाठ की अनुमति देने का अनुरोध किया जिसे ठुकरा दिया गया। 

अप्रैल 2003 में इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देश पर पुरातात्विक सर्वेक्षण विभाग ने विवादित स्थल की खुदाई शुरू की। जून माह तक खुदाई चलने के बाद आई रिपोर्ट में कहा गया कि उसमें मंदिर से मिलते-जुलते अवशेष मिले हैं।

 



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