
Ayodhya Ram Mandir
– फोटो : अमर उजाला
विस्तार
रामलला को जन्मभूमि में स्थापना के लिए करीब 500 वर्षों का इंतजार करना पड़ा। सिर्फ रामलला को नहीं, बल्कि अयोध्या के ही एक अन्य मंदिर में भी भगवान राम को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा था। करीब 220 वर्षों तक सरयू नदी में डूबे रहने के बाद आखिरकार उनकी स्थापना मंदिर में की जा सकी थी।
नवनिर्मित राममंदिर में श्याम रंग के रामलला की मूर्ति विराजित की गई है। अयोध्या में श्याम रंग के एक और राम विराजमान हैं, जो कालेराम के नाम से विख्यात हैं। मान्यता है कि महाराजा विक्रमादित्य ने कालेराम को रामजन्मभूमि परिसर में ही स्थापित किया था। यह मूर्ति 1500 वर्षों तक रामजन्मभूमि में ही विराजित रही।
सरयू किनारे नागेश्वरनाथ मंदिर के पीछे प्राचीन कालेराम मंदिर स्थित है। मंदिर में स्थापित राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न और सीता जी कि मूर्तियों को लेकर मान्यता है कि इन्हें विक्रमादित्य ने दो हजार वर्ष पहले रामजन्मभूमि में स्थापित किया था।
1528 के आसपास बाबर की सेना ने अयोध्या में जन्मभूमि पर आक्रमण किया तो तत्कालीन पुजारी श्यामानंद ने भगवान के विग्रह को बचाने के लिए सरयू नदी में प्रवाहित कर दिया था। यह विग्रह 1748 के आसपास सरयू किनारे सहस्त्र धारा के पास महाराष्ट्रीयन संत नरसिंह राव मोघे को मिला।
