बाबा ने आयोग को बताया कि वह हादसा होने से 35 मिनट पहले ही निकल चुके थे। उनके जाने के बाद एक साजिश के तहत यह हादसा किया गया है। उनके यहां चरण रज लेने जैसी कोई प्रथा नहीं है।
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नारायण साकार हरि बाबा
– फोटो : संवाद
हाथरस में सिकंदराराऊ तहसील के गांव फुलरई मुगलगढ़ी में 2 जुलाई को सत्संग में भगदड़ मचने से हुई 121 लोगों की मौत के मामले में 10 अक्टूबर को लखनऊ में तीन सदस्यीय न्यायिक आयोग के समक्ष बाबा नारायण साकार हरि उर्फ सूरजपाल की पेशी हुई। बाबा ने आयोग को बताया कि वह हादसा होने से 35 मिनट पहले ही निकल चुके थे। उनके जाने के बाद एक साजिश के तहत यह हादसा किया गया है। उनके यहां चरण रज लेने जैसी कोई प्रथा नहीं है।
बाबा के अधिवक्ता एपी सिंह ने बताया कि करीब सवा दो घंटे तक बाबा सूरजपाल के आयोग के समक्ष बयान दर्ज किए गए। उन्होंने बताया कि न्यायिक आयोग ने हादसे के वक्त बाबा की मौजूदगी सहित अन्य पहलुओं पर वार्ता की है। उन्होंने बताया कि बाबा सूरजपाल ने आयोग को यह भी बताया कि चरण रज लेने वाली बात मिथ्या है। उनके सत्संग के दौरान चरण रज लेने जैसी कोई परंपरा नहीं है। आयोग के समक्ष अब तक इस हादसे से जुड़े लगभग सभी लोगों के बयान दर्ज हो चुके हैं। अब आयोग जल्द ही अपनी रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेज देगा।
एपी सिंह ने बताया कि हमने न्यायिक आयोग के समक्ष मांग रखी है कि इस तरह होने वाले हादसों को रोकने के लिए एक मसौदा तैयार करें। इस मसौदे के आधार पर प्रदेश सरकार को गाइड लाइन जारी करनी चाहिए और हर कार्यक्रम में इसका पालन कराना चाहिए। इस हादसे की हकीकत का पर्दाफाश होना चाहिए। जो भी दोषी मिले, उसे सजा मिलनी चाहिए। किसी निर्दोष को दंड नहीं मिलना चाहिए। एपी सिंह ने बताया कि हमने जो 1100 शपथपत्र दिए हैं, वह चार्जशीट में शामिल किए गए हैं।