
प्रेसवार्ता में मौजूद साधु-संत।
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प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल होने आए संतों ने रविवार को राम की पैड़ी पर प्रेस वार्ता की। इस दौरान श्रीराम जन्मभूमि मंदिर आंदोलन से लेकर देश के साधु संतों के योगदान और राजनीति पर संतों ने बात की।
योगगुरु रामदेव ने वार्ता की शुरुआत करते हुए कहा कि वर्ष 1947 में देश को राजनीतिक आजादी मिली थी, लेकिन अब श्रीरामलला की प्राण प्रतिष्ठा के साथ ही देश को सांस्कृतिक स्वतंत्रता मिलने जा रही है। इसका सभी देशवासी बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
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उन्होंने प्राण प्रतिष्ठा के मुहूर्त को लेकर कहा कि मंदिर निर्माण स्वयं प्रभु की इच्छा से हो रहा है और प्राण प्रतिष्ठा जब श्रीराम की हो तो सभी मुहूर्त दिव्य हो जाते हैं। इससे जुड़े सवाल करने वाले लोग अज्ञानी हैं। वहीं वार्ता में मौजूद साध्वी ऋतंभरा ने मंदिर आंदोलन के दिनों को याद करते हुए कहा कि प्राण प्रतिष्ठा हो रही है, लोग पूछते हैं कि इसका श्रेय किसे दिया जाए।
उन्होंने बताया कि इसमें असंख्य रामभक्तों का रक्त बहा है। कई माताओं के पुत्र छिने हैं, कइयों का सिंदूर मिटा है। घरों के आंगन सूने हो गए तब जाकर ये दिन देखने को मिला है। इस बीच उन्होंने कई ओजस्वी कविताओं का पाठ भी किया। प्रेस वार्ता में डॉ. परमात्मानंद सरस्वती, ज्ञानानंद महाराज, निर्मलानंदनाथ, माधवप्रियदास, आचार्य कृष्णमणि दास, संतोषदास (सतुआ बाबा) व आलोक दास मौजूद रहे।
