
रात में जागकर पहरा देते लोग।
– फोटो : अमर उजाला।
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तहसील क्षेत्र महसी के 50 से अधिक गांवों में भेड़ियों की दहशत है जो धीरे-धीरे अन्य तहसील क्षेत्रों में भी फैलती जा रही है। भेड़ियों से बचाव के लिए प्रभावित गांवों में सोलर व हाईमास्ट लाइटों की स्थापना की जा रही है। वहीं डीएम के निर्देश पर स्कूलों में आश्रय स्थल बनाए जा रऐ हैं ताकि छप्परों में रहने वाले गरीब परिवार सुरक्षित हो सकें लेकिन इन सब के बीच जिम्मेदार पूर्व में गांव-गांव लगाई गईं स्ट्रीट लाइटों को भूल गए हैं। अमर उजाला टीम ने दहशत के बीच रात में सबसे ज्यादा जरूरी प्रकाश व्यवस्था को लेकर पड़ताल की। ज्यादातर स्ट्रीट लाइटें बुझी मिलीं। बस कुछ स्थानों पर ही खंभों पर रोशनी दिखी। यह नजारा क्षेत्र में बड़े स्तर पर स्ट्रीट लाइट घोटाले की ओर इशारा कर रहा है।
औराही, जागीर, पिपरीमोहन व वर्मापुरवा में मिला अंधेरा
भेड़िया प्रभावित औराही, जागीर, पिपरीमोहन व वर्मापुरवा आदि गांवों की गलियां अंधेरे व सन्नाटे में डूबी नजर आईं। यहां स्ट्रीट लाइटें बुझी मिलीं। बस यहां-वहां कुछ स्थानों पर ही जलती दिखीं।
मैकुपुरवा में नहीं लगी सोलर लाइट
ग्राम पंचायत मैकूपुरवा की पड़ताल के दौरान यहां स्ट्रीट लाइट तो मिली लेकिन दो-दो हमलों के बाद भी यहां सोलर लाइट जलती नहीं मिली। ग्रामीणों व वन विभाग की टीम के साथ मौजूद प्रधान अनूप सिंह से इस संबंध में जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि अभी कहीं भी सोलर लाइट नहीं लगी है।
ऊहापोह में किसान, फसल बचाएं या परिवार
भेड़ियों के आतंक से सबसे ज्यादा क्षेत्रीय किसान प्रभावित हैं। किसान परिवार की रखवाली के साथ-साथ खेतों की रखवाली की दोहरी मार झेल रहे हैं। शनिवार की रात जब अमर उजाला टीम ने पड़ताल के दौरान यहां-वहां बैठे किसानों से बातचीत की तो उनका दर्द खुलकर सामने आया।
