
पौराणिक शिवालेबाग शिव मंदिर
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बहराइच के नानपारा नगर के बाईपास रोड स्थित पांडव कालीन पौराणिक शिवालेबाग शिव मंदिर लाखों लोगों की आस्था का प्रतीक है। सावन मास में यहां आस्था का सैलाब उमड़ता है और जलाभिषेक के लिए लंबी-लंबी लाइनें लगती है। वहीं, हजारो कांवड़िए यहां जलाभिषेक के बाद दूसरे मंदिरों में जलाभिषेक के लिए कूच करते हैं। ग्रामीणों में मान्यता है कि मंदिर का शिवलिंग हल से खेत की जोताई के दौरान भूमि से निकला था। वहीं, अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने भी यहां कई दिनों तक पूजन-अर्चना की थी।
नानपारा तहसील स्थित शिवालेबाग शिव मंदिर बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर और गोंडा के साथ-साथ पड़ोसी देश नेपाल के भी लाखों हिंदुओं के आस्था का प्रतीक है। सामान्य दिनों में जहां प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु पूजन अर्चन के लिए आते हैं वहीं नव दंपत्ति भी यहां आर्शीवाद व दर्शन के लिए पहुंचते हैं। सावन मास के दौरान इस पांडव कालीन मंदिर पर श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है और लंबी-लंबी कतारें देखने को मिलती हैं। श्रद्धालुओं की आस्था है कि सच्चे मन से यहां पूजा-अर्चना करने से भोलेनाथ हर मनोकामना पूरी कर देते हैं। सावन के साथ ही शिवरात्रि में यहां मेले जैसा माहौल रहता है।
खेत से निकली थी शिवलिंग, पांडवों ने की थी पूजा-अर्चना
शिव भक्तों की माने तो शिवालेबाग मंदिर की शिवलिंग हल से खेत की जोताई के दौरान भूमि से निकली थी। जमीन से शिवलिंग प्रकट होने के बाद लोगों ने अरघा बनाकर पूजना शुरु कर दिया था। जब अज्ञातवास के दौरान पांचो पांडव यहां पहुंचे तो कई दिनों तक उन्होंने भी यहां पूजन किया।
