दहेज की मांग पूरी न होने पर बहू को पीटकर फंदे पर लटका देने के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम चंद्रपाल द्वितीय की अदालत ने शनिवार को पति को दोषी करार देते हुए 10 वर्ष के सश्रम कारावास सुनाया है। अदालत ने दोषी पति पर अन्य धाराओं में भी सजा और 4000 रुपये का अर्थदंड लगाया है। अर्थदंड की अदायगी न करने पर उसे 6 माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। सजायाफ्ता वारंट बनाकर दोषी को जेल भेज दिया गया है। वहीं ससुर और सास को संदेह का लाभ देते हुए अदालत ने दोषमुक्त कर दिया।

बदौसा थाना क्षेत्र के बच्चा का पुरवा अंश तुर्रा निवासी उमाकांत पुत्र झंडू वर्मा ने थाना बिसंडा में 12 सितंबर 2021 को एक तहरीर के माध्यम से प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उन्होंने अपनी पुत्री अनीता की शादी 22 मई 2017 को बिसंडा थाना क्षेत्र के पल्हरी गांव निवासी मान सिंह पुत्र शिवभवन वर्मा के साथ की थी। शादी के कुछ समय बाद जब अनीता चौथी से लौटकर मायके आई तो उसने अपने माता-पिता को बताया कि शादी में दहेज के तौर पर बाइक और 50 हजार रुपये कम दिए गए थे। इसके बाद से ही पति मान सिंह, ससुर शिवभवन वर्मा, सास बिसनिया, जेठ गौतम, देवर अनिल, ननद फूला व शोभा ताने देने लगे।

दोषी पति मान सिंह और अनीता से एक पुत्री भी हुई, जिसकी उम्र उस समय लगभग 2 वर्ष 6 माह थी। 6 सितंबर 2021 को रात करीब 8 बजे अनीता ने मोबाइल फोन पर अपने मायकेवालों को बताया कि ससुराल वाले उससे मारपीट कर रहे हैं। इसके बाद रात करीब 12 बजे उसके पति मान सिंह का फोन आया और उसने बताया कि अनीता भाग गई है। जब अनीता के पिता ने मामले की तह तक जाने की कोशिश की तो मान सिंह ने बताया कि अनीता ने फंदा लगा लिया है। जब उमाकांत सपरिवार पल्हरी पहुंचे तो उन्होंने अपनी पुत्री अनीता को मृत अवस्था में जमीन पर पड़ा पाया। उसके सिर और शरीर पर कई चोटों के निशान थे और उसके कपड़ों पर खून लगा हुआ था। इस स्थिति को देखकर उमाकांत ने आरोप लगाया कि उसकी पुत्री अनीता को जान से मारकर फंदे पर लटका दिया गया है।

विवेचक क्षेत्राधिकारी बबेरू शियाराम ने विवेचना के उपरांत केवल पति मान सिंह, सास बिसनिया और ससुर शिवभवन के खिलाफ 22 नवंबर 2021 को अदालत में आरोप पत्र प्रस्तुत किया। अदालत ने तीनों के विरुद्ध 6 अप्रैल 2022 को आरोप तय किए। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से 8 गवाह पेश किए गए। साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर अदालत ने ससुर शिवभवन और सास बिसनिया को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। वहीं, पति मान सिंह को अपने 36 पृष्ठों के विस्तृत फैसले में दोषी पाकर सजा दे दी।

 



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