गौतमबुद्ध नगर की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) अदालत ने गैंगस्टर रवि नागर उर्फ रवि काना के खिलाफ बी-वारंट के बावजूद आरोपी रिहाई मामले में डीजी जेल ने बांदा मंडल कारागार में तैनात जेलर विक्रम सिंह यादव को निलंबित कर दिया है। इसके अलावा बांदा जेल अधीक्षक अनिल गौतम के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए हैं। निलंबन की कार्रवाई होने के बाद दोनों अधिकारियों ने अपने सीयूजी नंबर बंद कर लिए हैं। पूरे मामले की जांच डीआईजी जेल प्रयागराज को सौंपी गई है।
जेल अधीक्षक अनिल गौतम ने बताया कि स्क्रैप माफिया रवि काना को प्रशासनिक आधार पर अगस्त 2024 को गौतमबुद्ध नगर से बांदा मंडल कारागार स्थानांतरित किया गया था। तब से यह यहां कारागार में बंद था। थाना सेक्टर-63 नोएडा में जबरन वसूली और आपराधिक धमकी के मामले में आरोपी को बी वारंट के जरिए न्यायालय में तलब किया गया था और विवेचक द्वारा रिमांड स्वीकृत कराने के लिए प्रार्थना पत्र भी प्रस्तुत किया गया था। 28 जनवरी 2026 को संबंधित प्रकरण पर न्यायालय का बी-वारंट कारागार को प्राप्त हुआ था। जिसमें 29 जनवरी को न्यायालय के समक्ष पेश करने का आदेश था। इस पर आरोपी को वीसी के माध्यम से पेश किया गया था। आरोपी के खिलाफ अन्य सभी मामलों में रिहाई के आदेश पहले से ही प्राप्त हो चुके थे। वह केवल बी-वारंट के मामले में ही बंद था। उसी दिन शाम को आरोपी को जेल से रिहा कर दिया गया था। इसे न्यायालय ने गंभीर प्रशासनिक लापरवाही माना है। इस आधार पर शनिवार को डीजी जेल पीसी मीणा ने तत्काल प्रभाव से बांदा जेलर विक्रम सिंह यादव को निलंबित कर दिया है। इसकी पुष्टि जेल अधीक्षक अनिल गौतम ने की है। उधर, जेल अधीक्षक के खिलाफ भी विभागीय जांच के आदेश हुए हैं। पूरे प्रकरण की जांच डीआईजी जेल प्रयागराज को सौंपी है।
