समाजवादी पार्टी में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। बुधवार को पार्टी के दो पदाधिकारियों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाकर पार्टी से निष्कासित किए जाने का पत्र जारी कर दिया। सपा जिलाध्यक्ष ने पत्र जारी कर पार्टी के प्रवक्ता व मीडिया प्रभारी को छह साल के लिए निष्कासित किया। इकसे कुछ देर बाद ही मीडिया प्रभारी ने जिलाध्यक्ष को 12 साल के लिए पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया। हालांकि पार्टी के अन्य पदाधिकारियों ने इससे अनभिज्ञता जताई है। वहीं सियासी गलियारों में इसकी खूब चर्चा है। सोशल मीडिया में इसको लेकर तरह-तरह के कमेंट किए जा रहे हैं।
बुधवार दोपहर सपा जिलाध्यक्ष मधुसूदन कुशवाहा ने पत्र जारी कर छात्र सभा के राष्ट्रीय सचिव व पार्टी के प्रवक्ता व मीडिया प्रभारी प्रमोद गुप्ता को छह वर्ष के लिए पार्टी से निष्कासित किया। जिलाध्यक्ष ने बताया कि प्रवक्ता की पार्टी विरोधी गतिविधियों व अवैध कार्यों में संलिप्तता की वजह से राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देशन पर उन्हें हटाया गया है। कहा कि कोर कमेटी के सदस्यों ने उनकी शिकायत राष्ट्रीय अध्यक्ष से की थी।
जिलाध्यक्ष ने कहा कि प्रमोद गुप्ता अवैध गुटखा फैक्टरी के संचालन में दोषी पाए गए हैं। पुलिस इस मामले की जांच भी कर रही है। वहीं इसके कुछ देर बाद ही प्रवक्ता प्रमोद गुप्ता ने अपने लेटर पैड पर जिलाध्यक्ष को पार्टी विरोधी गतिविधियों, अनुशासनहीनता और भाजपा से सांठगांठ के आरोप में पार्टी सुप्रीमो के निर्देश पर 12 वर्ष के लिए निष्कासित करने का पत्र जारी किया। उन्होंने कहा कि जिलाध्यक्ष फर्जी तरीके से आमजन को गुमराह कर रहे हैं। इस संबंध में पार्टी के महिला सभा की राष्ट्रीय सचिव नीलम गुप्ता ने कहा कि उन्हें मामले की कोई जानकारी नहीं है। पार्टी के पेज पर किसी को लेकर कोई सूचना नहीं आई है। दूसरी ओर सपा के अंदर मची खींचतान से जिले के लोगों में कौतूहल है।