
बाराबंकी में गिरफ्तार हुए नीरज, अतहर और अभिषेक।
– फोटो : amar ujala
विस्तार
सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर बेरोजगारों से करोड़ों की ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश एसटीएफ ने किया है। कुर्सी थाना क्षेत्र में किराए के एक मकान में छापा मारकर एसटीएफ ने तीन शातिर को गिरफ्तार किया है। इनके पास से एसटीएफ में भारी मात्रा में फर्जी नियुक्ति पत्र, 47 लोगों की शैक्षिक प्रमाण पत्र, शासन में तैनात उच्चाधिकारियों की फर्जी मुहरें वी अन्य सामान बरामद किया है।
एसटीएफ के अनुसार उसे काफी दिनों से प्रदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले गिरोहों के सक्रिय होने की सचूनाएं प्राप्त हो रही थी। दो-तीन दिन पहले पता चला कि एक गिरोह सक्रिय है, जिसमें लखनऊ निवासी अभिषेक प्रताप सिंह अपने साथियों के साथ बेरोजगार युवकों को बहला फुसलाकर सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी का कार्य कर रहा हैं।
शुक्रवार को एसटीएफ को सूचना मिली कि अभिषेक प्रताप सिंह अपने एक साथी अतहर हुसैन के साथ कुर्सी थाना क्षेत्र के अनवारी गांव के आखिर में एक घर को किराये पर लेकर ठगी का काम कर रहा है। जिनसे मिलने उसका साथी नीरज मिश्रा आने वाला है। एसटीएफ ने दबिश मारकर कमरे से आलमबाग कृष्णानगर निवासी अभिषेक प्रताप सिंह, संत कबीर नगर जिले के खलीलाबाद थाना क्षेत्र के अतहर हुसैन और कानपुर नगर जिले के थाना नौबस्ता के यशोदा नगर निवासी नीरज मिश्रा को गिरफ्तार किया।
पुलिस के अनुसार इन तीनों द्वारा गिरोह बनाकर बेरोजगार युवक-युवतियों से नौकरी के नाम पर ठगी की जा रही थी। शहर में ठगी करनी होती थी उस शहर के किनारे एकांत में किराए पर मकान लेकर अपना गोरखधंधा फैलाते थे। पोस्टर होर्डिंग, फर्नीचर आदि की व्यवस्था कर मकान को ट्रेनिंग सेंटर में परिवर्तित कर देते थे। बेरोजगार युवक युवती या इनके जाल में आसानी से फंस जाते थे और उनसे नौकरी के नाम पर 2 से 3 लाख रुपए वसूले जाते थे।
नौकरी के नाम पर यही पर कुछ दिन ट्रेनिंग देकर उनसे विभिन्न विषयों प्रोजेक्ट तैयार कराते हैं।ताकि अभ्यर्थियों को लगे की उनकी वास्तविक ट्रेनिंग चल रही है। उन्हें फर्जी सर्विस बुक दी जाती थी। एक महीने का स्टाइपेन्ड जो दो से तीन हजार रुपये होता था अभ्यर्थियों के खाते में भेजते हैं। वसूली के बाद मोबाइल नंबर बंद कर सभी फरार हो जाते थे। इनके पास से उत्तर प्रदेश वन निगम / उत्तर प्रदेश जल निगम शहरी / राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन का लोगो लगे रंगीन प्रिंट, ट्रेनिंग लेटर व नियुक्ति पत्र फर्जी हस्ताक्षर करके व फर्जी मुहर लगाकर भेजता था और विश्वास दिलाने के लिए ही इन्ही विभागों का पोस्टर, बैनर बनवाकर उसे ट्रेनिंग सेण्टर पर लगाते थे। कुर्सी थाने में मुकदमा लिखा गया है।
