बरेली में आवास एवं विकास परिषद की परसाखेड़ा आवासीय योजना में जमीन देने से किसानों ने इन्कार कर दिया है। लैंड पूलिंग स्कीम के तहत जमीन देने की सहमति देने वाले किसानों ने अब रजिस्टर्ड एग्रीमेंट से हाथ पीछे खींच लिए हैं। उनका कहना है कि अधिकारी तीन साल से किसानों के साथ धोखा कर रहे हैं। अब वह रजिस्टर्ड एग्रीमेंट कराकर किसानों की फसल मुआवजा भी बंद करना चाहते हैं।

परसाखेड़ा आवासीय योजना गांव टियूलिया, धंतिया, हमीरपुर, वोहित, फरीदापुर रामचरण, बल्लिया, मिलक इमामगंज की 522 हेक्टेयर जमीन पर कॉलोनी विकसित होनी है। योजना वर्ष 2011 से प्रस्तावित है। दो नवंबर 2022 को लैंड पुलिंग स्कीम के तहत 149 हेक्टेयर जमीन पर योजना स्वीकृत हुई थी। बाद में परिषद ने सातों गांव की जमीन पर आवासीय योजना विकसित करने का निर्णय लिया था। दो सौ से अधिक किसानों ने लैंड पूलिंग स्कीम के तहत 68 हेक्टेयर जमीन देने की सहमति दी थी।

अप्रैल 2023 में आवास एवं विकास परिषद ने जमीन पर काम कराने के लिए किसानों से तीन वर्ष का लिखित समझौता किया। इसके मुताबिक, परिषद जब तक किसानों को उनकी जमीन पर प्लॉट  विकसित करके नहीं देता, तब तक पांच हजार रुपये प्रति हेक्टेयर प्रति  माह की दर से फसल का मुआवजा देगा। अब किसानों का कहना है कि तीन वर्ष बीतने को हैं, मगर अभी तक उनकी जमीन पर काम शुरू नहीं हुआ। अधिकारी किसानों को गुमराह कर रहे हैं। किसानों ने मांग की है कि परिषद मुआवजा देकर उनकी जमीन का अधिग्रहण करे, तभी किसान रजिस्टर्ड एग्रीमेंट कराएंगे।

जानिए, क्या है लैंड पूलिंग स्कीम

लैंड पूलिंग स्कीम का मतलब सहभागिता से है। इसके तहत अगर कोई किसान अपनी छह बीघा भूमि आवास एवं विकास परिषद को देगा तो इसके 50 फीसदी हिस्से यानी तीन बीघे पर सड़कें, लाइटें, पार्क आदि विकसित किए जाएंगे। 1.5 बीघा भूमि किसान को लौटाई जाएगी, जबकि शेष 1.5 बीघा भूमि पर परिषद कॉलोनी विकसित करेगा।

 



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