मोबाइल फोन और सोशल मीडिया की बढ़ती लत खतरनाक है। किशोर और युवा इसकी वजह से अवसाद का शिकार हो रहे हैं। कई बार वे अपराध के दलदल में भी फंस जा रहे हैं। इसका इस्तेमाल बेहद सावधानी से करें। ये बातें एसपी सिटी मानुष पारीक ने शनिवार को फरीदपुर स्थित राजकीय डिग्री कॉलेज में अमर उजाला की ओर से आयोजित पुलिस की पाठशाला में विद्यार्थियों से कहीं।
उन्होंने बताया कि देश के आजाद होने से पहले अंग्रेज यहां अफीम की खेती कराते थे। उसे चीन के युवाओं को बेहद सस्ते दामों पर उपलब्ध कराया जाता था। जब वहां की युवा पीढ़ी इस नशे की गुलाम हो गई तो इसकी कीमतें बढ़ा दी गईं। नतीजा, चीन अंदरूनी रूप से कमजोर हो गया। आज मोबाइल फोन वही मॉडर्न अफीम बन चुका है। गाजियाबाद की घटना का हवाला देते हुए बताया कि कैसे मोबाइल फोन की लत अपराध और अवसाद का कारण बन रही है।
उन्होंने कहा कि देश के 86 फीसदी लोगों तक इंटरनेट पहुंच चुका है। इसका नकारात्मक प्रभाव यह है कि युवाओं की एकाग्रता घट रही है। स्क्रीन टाइम बढ़ने से गंभीर शारीरिक-मानसिक परेशानियां भी जन्म ले रही हैं। पहले माता-पिता बच्चों को टीवी देखने से रोकते थे। कभी रिमोट छिपा देते थे तो कभी समय तय कर देते थे। आज के दौर में बच्चे चौबीस घंटे स्क्रीन से चिपके रहते हैं। यह उनके भविष्य के लिए बड़ा खतरा है।
साइबर सुरक्षा की दी जानकारी
साइबर थाने के एसआई अंकित सिंह चौहान ने विद्यार्थियों को साइबर अपराधों से बचाव की जानकारी दी। उन्होंने विशेष रूप से छात्राओं को सचेत करते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर अनजान व्यक्ति के मित्रता अनुरोध को स्वीकार न करें। अपने सभी सोशल मीडिया अकाउंट और ई-मेल पर टू-स्टेप वेरिफिकेशन अनिवार्य रूप से लागू करें। अपनी निजी जानकारी और तस्वीरें साझा करने से पहले सौ बार सोचें। इस दौरान एसआई सौरभ सिवाज, तरुण कुमार, मानसी हुड्डा, हरेंद्र, प्राचार्य प्रो. पूनम सक्सेना व अन्य लोग मौजूद रहे।
