वसंत पंचमी के लिए दयालबाग वसंती रंग में रंग गया है। राधा स्वामी मत में वसंत पंचमी का विशेष धार्मिक महत्व है। इस वजह से अनुयायियों के घरों से लेकर खेतों और सत्संग स्थलों तक उत्सव का माहौल दिखाई दे रहा है। मेहरबाग, मैत्री बाग व पूरे दयालबाग में साफ-सफाई से लेकर साज-सज्जा और रंग-बिरंगी लाइटों से सजावट की गई है।

वर्ष 1861 में वसंत पंचमी के दिन ही आम लोगों के लिए सत्संग की शुरूआत की गई, वहीं राधास्वामी सत्संग दयालबाग की स्थापना भी वसंत पंचमी पर वर्ष 1915 में की गई। मत के अनुयायियों के लिए यह पर्व आस्था और परंपरा का प्रतीक है। राधा स्वामी संवत के अनुसार इसी दिन से नए वर्ष का शुभारंभ भी होता है। मान्यता है कि वसंत पंचमी के दिन सभी संत सतगुरु धरती पर अपने दर्शन देने आते हैं। इसी श्रद्धा भाव के साथ सुबह से ही बूढ़े-बच्चों व सभी आयु वर्ग के लोग खेतों में शब्द-पाठ और सेवा कार्य में जुट जाते हैं। शाम को पुन: सेवा कार्य करके गुरु के चरणों में शुकराना अर्पित किया जाता है।

दयालबाग निवासी शरद सिन्हा का कहना है कि वसंत पंचमी पर दयालबाग में उमंग और उत्साह है। सत्संगी परिवार अपने घरों की और कॉलोनी की साज-सज्जा में जुटे हैं।

 कर्नल आरके सिंह (रि.) ने बताया कि वसंत पंचमी पर सत्संगियों को नई ऊर्जा मिलती है। पर्व पर देश विदेश से आए सत्संगी भाग लेते हैं और सेवा भक्ति से परिपूर्ण होकर गुरु महाराज के चरणों में शुकराना अर्पित करते हैं।

अदनबाग शाखा सचिव सुरेश कुमार का कहना है कि दयालबाग की सभी शाखाओं में वसंत हर्षोल्लास से मनाते हैं। जनवरी की शुरूआत से ही सजावट, सफाई, नए कपड़ों से लेकर पकवान की तैयारियां चलती हैं।

श्रुति सिन्हा ने बताया कि हर साल छोटे बच्चों को उपहार देते हैं, जिससे उनकी खुशी दोगुनी हो जाती है। हर घर वसंत के रंग में रंग जाता है।

 



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