आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) छात्र-छात्राओं के लिए पढ़ाई का अहम माध्यम बनता जा रहा है। बोर्ड परीक्षा की तैयारी करने वालों से लेकर विश्वविद्यालयों व प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वालों में इसका क्रेज है। बड़ी संख्या में एआई के जरिये सवालों के जवाब तलाश रहे हैं। वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि एआई पढ़ाई को आसान बना सकता है, पर गुरु नहीं बन सकता।
जीआईसी के प्रधानाचार्य मानवेंद्र सिंह ने बताया कि एआई कठिन विषयों को सरल भाषा में समझाने, त्वरित जानकारी देने और रिवीजन में मददगार साबित होता है। पर, कई बार एआई की ओर से उत्तर गलत, अधूरे या पाठ्यक्रम से अलग भी आते हैं। यदि छात्र बिना क्रॉस चेक किए इन उत्तरों को अपनाते हैं, तो परीक्षा में गलती हो सकती है। समझने के लिए एआई सहायक हो सकता है पर अपने गुरु से जरूर पुष्टि करें। गणित शिक्षक ज्ञानेंद्र ने बताया कि शिक्षकों के नोट्स और प्रामाणिक शैक्षणिक स्रोतों को प्राथमिकता दें। गणित के फार्मूले या उन्हें एआई के माध्यम से हल न करें। बल्कि स्वयं प्रयास करें अन्यथा पेपर के समय दिक्कत आएगी।
वहीं, विश्वविद्यालय स्तर के छात्रों को शोध, असाइनमेंट और प्रोजेक्ट में एआई से मिली जानकारी की प्रामाणिकता जांचने की सलाह दी जा रही है। पर्यावरण अध्ययन विभागाध्यक्ष प्रो. भूपेंद्र स्वरूप ने बताया कि एआई को ज्ञान के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं पर उसे प्रामाणिक न मानें।
छात्रों को सलाह दी जा रही है कि वह प्रोजेक्ट, शोध आदि कार्यों में एआई का आइडिया के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं पर पूरी तरह से भरोसा नहीं करें।
जेईई मेन के लिए निशुल्क सुविधा
गूगल जेमिनी ने जेईई मेन की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए जेमिनी एआई के माध्यम से निशुल्क सुविधा शुरू की है। इसके तहत चैटबॉट पर छात्र अब पूरे जेईई मेन का मॉक टेस्ट दे सकते हैं। इसके लिए जेमिनी में जेईई मेन मॉक टेस्ट डालें और स्टार्ट पर क्लिक करें। पूरा होने पर जेमिनी तुरंत छात्र के स्कोर और गलतियों का विस्तृत विश्लेषण कर देगा।
