आगरा। पश्चिम एशिया में संघर्ष से उपजे गैस संकट के बीच मुनाफाखोरों ने गरीबों के लिए शुरू गई प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना में सेंधमारी शुरू कर दी है। शुक्रवार को जगनेर के तांतपुर स्थित एक घर में बने अवैध गोदाम से 128 घरेलू सिलिंडरों की बरामदगी ने आपूर्ति विभाग की नींद उड़ा दी है। शुरुआती जांच में पता चला है कि बरामद किए गए सिलिंडर उज्ज्वला योजना के हैं और सिलिंडरों को बिचौलियों के जरिये कालाबाजारी कर 2500 रुपये में बेचा जा रहा था। विभाग कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।

जिले में कुल 12 लाख एलपीजी उपभोक्ता हैं, जिनमें से 3.41 लाख उज्ज्वला योजना के लाभार्थी हैं। इन लाभार्थियों को 923 रुपये वाले सिलिंडर पर 335 की सब्सिडी मिलती है। इसी का फायदा उठाने के लिए कालाबाजारी करने वाला सिंडिकेट सक्रिय हो गया है। शिकायतें मिली हैं कि ये लोग गरीब उपभोक्ताओं से कम दामों में सिलिंडर खरीदकर किल्लत के बीच 2500 में बेच रहे हैं।

होली के त्योहार और बाजार में गैस किल्लत के बीच सब्सिडी वाले सिलिंडरों की खपत के आंकड़ों ने विभाग को चौंका दिया है। होली से पहले उज्ज्वला योजना के उपभोक्ता हर माह औसत एक लाख सिलिंडर ले रहे थे। वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर करीब ढाई लाख पहुंच गया है। आगरा में प्रतिदिन करीब 150 टन एलपीजी की खपत दर्ज की जा रही है।

जिलापूर्ति अधिकारी आनंद कुमार ने बताया कि उज्ज्वला योजना में सेंधमारी और कालाबाजारी की शिकायतों को गंभीरता से लिया जा रहा है। अवैध भंडारण वाले के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। गरीब उपभोक्ताओं से सिलिंडर खरीदकर ऊंचे दामों पर बेचने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।


छापे के बाद मची खलबली

तांतपुर में अवैध गोदाम पर कार्रवाई के बाद आपूर्ति विभाग उन वितरकों और बिचौलियों की कुंडली खंगाल रहा है, जिनके जरिये इतनी बड़ी संख्या में सिलिंडर आरोपी अशोक सिंघल को मिले। विभाग की टीमें अब ग्रामीण इलाकों में संदिग्ध ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। जिलापूर्ति अधिकारी ने बताया कि आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जा चुकी है। उसने इतनी बड़ी संख्या में सिलिंडर कहां से लिए, यह पता लगाया जा रहा है।



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