
सांकेतिक तस्वीर
– फोटो : अमर उजाला
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इत्र और आलू…कन्नौज की पहचान हैं। यहां का बना इत्र देश-दुनिया के कई हिस्सों तक पहुंचता है। आलू उत्पादन में भी प्रदेश में कन्नौज का तीसरा स्थान है। यहां के लोगों के लिए यह दोनों ही उपलब्धियां गर्व का विषय हैं। रिश्वतखोरों ने इन दोनों को अवैध वसूली का कोड बना लिया है। किसी काम के बदले में रिश्वत लेने के लिए इन दोनों को कोड के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। यहां बालू या मिट्टी खनन करने वालों से रिश्वत की वसूली भी आलू कोड से की जाती है।
एक दिन पहले किसी काम के बदले रिश्वत में आलू मांगने वाले दरोगा के निलंबन के बाद जो जानकारी सामने आ रही है, वह काफी चौंकाने वाली है। हालांकि पुलिस इस मामले की जांच के बाद ही पूरी तस्वीर साफ करने की बात कह रही है, लेकिन जानकार बता रहे हैं कि आलू दरअसल कोड के रूप में इस्तेमाल किया गया है। आलू कोड से रुपये की बात की जा रही है। पांच किलो आलू यानी पांच हजार रुपये की रिश्वत।
दरोगा और कॉलर के बीच बातचीत में पांच किलो, तीन किलो से होकर दो किलो में सौदा होने की बात दरअसल पांच हजार, तीन हजार के बाद दो हजार में सौदा की बात है। जानकार यह भी बता रहे हैं कि कई थानों और पुलिस चौकी में उस इलाके के कारोबार के मुताबिक कोड तैयार किया जाता है। पुलिस और उसके दलालों के बीच अमूमन किसी भी मामले के निपटारा के लिए रुपयों के लेन-देन की बात कोड में ही होती है। चूंकि कन्नौज में आलू की पैदावार ज्यादा होती है, इसलिए किसी को शक न हो तो आलू को ही रिश्वत के लेन-देन के लिए कोड के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। मकसद यह है कि कोई तीसरा सुने भी तो उसे लगे कि सब्जी की बात हो रही है, जबकि बात रिश्वत की हो रही होती है।
