
प्राकृतिक खेती को दिया जाएगा बढ़ावा।
विस्तार
केंद्रीय बजट में अगले दो वर्षों में एक करोड़ किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए मदद देने की घोषणा से यूपी में भी इस विधा की खेती को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जगी है। अभी तक प्राकृतिक खेती बुंदेलखंड तक सीमित है, लेकिन अब इसका पूर्वांचल और मध्य क्षेत्र में भी विस्तार किया जा सकेगा।
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प्रदेश में अभी बुंदेलखंड के सात जिलों में प्राकृतिक खेती के 470 क्लस्टर बनाए गए हैं। इसमें 235 को पिछले वर्ष और 235 को इस वर्ष चयनित किया गया है। 47 ब्लॉक के 21854 किसानों को प्रशिक्षण दिया गया है। उन्हें जैविक खाद और बीज आदि की सुविधा मुहैया कराई जाती है। वित्तीय वर्ष 2022-23 में बुंदेलखंड को 4.30 करोड़ रुपये दिए गए हैं। अब केंद्र सरकार की ओर से इस योजना को बढ़ावा देने की बात कही गई है। कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अब बुंदेलखंड के अलावा पूर्वांचल के किसानों को भी इसके दायरे में लाया जाएगा। फिर अगले चरण में मध्य क्षेत्र के किसानों को भी प्राकृतिक खेती से जोड़ा जाएगा। विभाग की रणनीति है कि अगले दो साल में करीब 50 हजार किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ा जाए। इसी रणनीति के तहत प्रदेश के 700 किसानों को गुरुकुल कुरुक्षेत्र भेजकर प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। ये किसान अब अन्य किसानों को प्रशिक्षित करेंगे। कृषि विभाग की टीम खेती करने वाले किसानों को प्राकृतिक खेती करने का प्रमाणपत्र भी देगी। प्रदेश में जैव अदान संसाधन केंद्र बनाने की कवायद शुरू कर दी गई है।
प्रदेश में हैं नौ कृषि जलवायु क्षेत्र
प्रदेश में 9 तरह के कृषि जलवायु क्षेत्र हैं। ऐसे में अलग-अलग क्षेत्रों में हर तरह के फल, सब्जियों और फूलों की खेती होती है। प्रदेश के करीब 80 फीसदी किसान लघु एवं सीमांत हैं। ये गेहूं, धाम, गन्ना के रूप में परंपरागत खेती करते हैं। अब इन्हें जलवायु आधारित खेती करने को प्रेरित किया जा रहा है।
प्रदेश में 40 प्रजातियों पर चल रहा है शोध
केंद्र सरकार की ओर से बजट प्रावधान किए जाने से नई प्रजाति की खोज को बढ़ावा देने पर जोर है। ऐसे में प्रदेश के कृषि विश्वविद्यालयों में गेहूं, धान और गन्ने, आलू की 40 प्रजातियों पर शोध कार्य चल रहा है। अब इन्हें बढ़ावा मिलेगा। हर साल करीब पांच से 10 नई प्रजातियां विकसित हो सकेंगी। पिछले दिनों धान की एनडीआर-9730018 ,एनडीआर – 8029, एनडीआर-9407 और एनडीआर-8028 प्रजाति को शोध सलाहकार समिति ने मंजूरी दी थी। इसी तरह बुंदेलखंड के किसानों के लिए प्याज की एल 883 प्रजाति को विकसित किया गया था।
दलहन-तिलहन में होगी आत्मनिर्भरता
केंद्र सरकार की ओर से तिलहन में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए नई कार्यनीति बनाई गई है। इसके तहत उत्तर प्रदेश के नदियों के किनारे वाले इलाके के किसानों का क्लस्टर बनाकर दलहन-तिलहन का विकास किया जाएगा। दलहन, तिलहन की नई प्रजाति विकसित करने की तैयारी है। मूंगफली और सोयाबीन की अन्य प्रदेशों की प्रजातियां का अध्ययन कराया जाएगा, ताकि प्रदेश की जलवायु के अनुसार यहां तिलहन की प्रजाति की बुवाई करके उत्पादन बढ़ाया जा सके।
हर जिले में होगा बागवानी क्लस्टर
प्रदेश में बागवानी से जुड़ी फल, फूल एवं सब्जियों की खेती का रकबा लगातार बढ़ रहा है। केंद्र सरकार ने बजट में सब्जी उत्पादन क्लस्टर विकसित करने पर जोर दिया है। इससे हर जिले में बागवानी क्लस्टर विकसित करने की योजना परवान चढ़ सकेगी। अभी प्रदेश में कानपुर, कन्नौज और झांसी में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बने हैं। प्रदेश में हर जिले में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस एवं मिनी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाकर उन्नत पौध के उत्पादन को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। इस योजना को अब गति मिलेगी। इसके तहत साल 2027 तक प्रदेश में बागवानी फसलों का क्षेत्रफल 11.6 फीसदी से बढ़ाकर 16 फीसदी करने तथा खाद्य प्रसंस्करण का दायरा छह फीसदी से बढ़ाकर 20 फीसदी करने का लक्ष्य पूरा किया जा सकेगा। फिलहाल चंदौली, कौशाम्बी, सहारनपुर, लखनऊ, कुशीनगर और हापुड़ में बागवानी के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का निर्माण चल रहा है। बहराइच, अम्बेडकरनगर, मऊ, फतेहपुर, अलीगढ़, रामपुर हापुड़, सोनभद्र, मुरादाबाद, आगरा, संतकबीरनगर, महोबा, झांसी, बाराबंकी, लखनऊ, चंदौली, गोंडा, बलरामपुर, बदायूं, फिरोजाबाद, शामली और मीरजापुर में भी मिनी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस या हाईटेक नर्सरी बन रही हैं। वर्ष 2027 तक हर जिले में यह तैयार हो जाएगा।
बांदा और झांसी में लैब
खाद्य पदार्थों की जांच के लिए कृषि विश्वविद्यालय बांदा और झांसी में लैब बनाई जाएगी। यह एनएबीएल मान्यता प्राप्त होगी। बांदा के लिए 8.50 करोड़ और झांसी के लिए 15 करोड़ रुपये जारी कर दिए गए हैं। इससे खाद्य पदार्थों की जांच की जा सकेगी। अगले साल तक पांच नई लैब भी बनाने का प्रस्ताव है।
सभी 75 जिलों में शुरू होगी किसान रजिस्ट्री
केंद्रीय बजट में 400 जिलों में खरीफ डिजिटल फसल सर्वेक्षण करने और किसान रजिस्ट्री करने की बात कही गई है। यह दोनों कार्य प्रदेश में शुरू हो गए हैं। प्रदेश के सभी 75 जिलों में खरीफ फसलों का डिजिटल सर्वे किया जा रहा है। इससे पहले 21 जिलों में यह कार्य किया जा चुका है। इसी तरह किसान रजिस्ट्री का कार्य इन दिनों 12 जिलों में चल रही है, जबकि इसे अगले माह से सभी जिलों में चलाने की तैयारी है। पहले चरण में पीएम किसान सम्मान निधि का लाभ पाने वाले किसानों की रजिस्ट्री की जाएगी।
जनता को सीधा फायदा
केंद्रीय बजट में किए गए प्रावधान से कृषि क्षेत्र में नया आयाम मिलेगा। किसान, कृषि उत्पादन संगठनों को सीधा फायदा मिलेगा। लोगों को गुणवत्तापरक फल, सब्जी व अनाज मिल सकेंगे। उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा तो इसका सीधा फायदा प्रदेश की जनता को भी मिलेगा। कृषि उत्पादन के साथ ही उसके सहवर्ती क्षेत्रों को भी तवज्जो की गई है।
सूर्य प्रताप शाही, कृषि मंत्री
