केंद्रीय बजट में उद्योग और शिक्षा के बीच की खाई को पाटने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। इसके तहत देश में पांच यूनिवर्सिटी टाउनशिप (अकादमिक जोन) स्थापित करने की घोषणा की गई है। उत्तर प्रदेश में तेजी से विकसित हो रहे औद्योगिक गलियारों को देखते हुए प्रदेश को इनमें से एक-दो अकादमिक ज़ोन मिलने की पूरी संभावना है, जिससे युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।

प्रदेश में 27 इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक क्लस्टर व औद्योगिक कॉरिडोर विकसित किए जा रहे हैं। इन क्षेत्रों में आईटी समेत विभिन्न सेक्टरों के प्रशिक्षित युवाओं की जरूरत होगी। अकादमिक ज़ोन उद्योगों की इस मांग को पूरा करने में सहायक साबित होंगे।

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इन ज़ोन में विश्वविद्यालय, कॉलेज, शोध संस्थान, कौशल विकास केंद्र, बैंक, बाजार, अस्पताल और आवासीय सुविधाएं उपलब्ध होंगी। यहां उद्योगों की जरूरत के अनुसार शिक्षा और प्रशिक्षण देकर युवाओं को सीधे रोजगार से जोड़ा जा सकेगा। अभी उद्योगों को खुद प्रशिक्षण की व्यवस्था करनी पड़ती है, जबकि अकादमिक ज़ोन इस समस्या का स्थायी समाधान देंगे।

एकेटीयू के कुलपति प्रो. जे. पी. पांडेय का कहना है कि यदि कोई अकादमिक जोन डिफेंस कॉरिडोर के पास बनता है, तो वह कौशल, शोध और आरएंडडी पर केंद्रित होगा। इससे उद्योगों की वास्तविक समस्याओं का समाधान संभव होगा। अमेरिका में विश्वविद्यालय उद्योगों से जुड़े होते हैं। प्रदेश के विश्वविद्यालयों को भी इसी दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

खेलो इंडिया मिशन देगा प्रतिभाओं को नया मंच

बजट में खेलो इंडिया योजना को मिशन के रूप में और व्यापक किया गया है। इसके तहत खेल विज्ञान और तकनीक, प्रतिस्पर्धाओं के आयोजन और खेल अवसंरचना को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे प्रदेश की खेल प्रतिभाओं को मंच मिलेगा और खेल उद्योग को भी गति मिलेगी। खेल सामग्री निर्माण को राष्ट्रीय स्तर पर प्रोत्साहन मिलने से मेरठ, नोएडा और आगरा जैसे पारंपरिक खेल उद्योग केंद्रों को लाभ होगा। मेरठ पहले से ही देश का प्रमुख स्पोर्ट्स गुड्स हब है। बजट प्रावधानों से आधुनिक तकनीक, गुणवत्ता सुधार और निर्यात क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी। खेल सचिव सुहास एलवाई ने कहा कि योजना को मिशन का रूप मिलने से यह और व्यापक होगी। साथ ही स्थानीय स्तर पर समय-समय पर प्रशिक्षण, खेलकूद आदि के लिए निर्णय भी लिए जा सकेंगे।



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