By-election: After the defeat of Faizabad, Milkipur seat became a question of BJP's prestige, Awadhesh Prasad

फैजाबाद सीट से विजयी प्रत्याशी अवधेश प्रसाद।
– फोटो : amar ujala

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अवधेश प्रसाद के द्वारा खाली की गई सीट मिल्कीपुर में उपचुनाव होने हैं। फैजाबाद की हार के बाद यह सीट भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन चुकी है। दूसरी ओर चूंकि यह सीट सपा की है इसलिए सपा पर एक मनोवैज्ञानिक दबाव पहले से है। उपचुनाव के लिए जिले की मिल्कीपुर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा में कई दावेदार सामने आ गए हैं। इनमें पूर्व विधायक से लेकर जिला पंचायत सदस्य और ग्राम प्रधान तक शामिल हैं। पासी समाज से सबसे ज्यादा नाम सामने आए हैं। यदि सपा ने भी पासी समाज से उम्मीदवार उतारा तो किसी अन्य जाति के प्रत्याशी पर भी विचार किया जा सकता है।

जिले की मिल्कीपुर सीट से विधायक रहे अवधेश प्रसाद के सांसद निर्वाचित होने के बाद यहां अब उपचुनाव होना है। सपा के वरिष्ठ नेता प्रसाद ने विधानसभा की सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया है। अब निर्वाचन आयोग को उपचुनाव की घोषणा करनी है। इसी के साथ लोकसभा चुनाव में हार का सामना करने वाली भाजपा में इस सीट पर एक बार कब्जा जमाने के मकसद से हलचल शुरू हो गई है।

वैसे तो यहां से पूर्व विधायक रहे बाबा गोरखनाथ अपनी उम्मीदवारी तय मानकर चल रहे हैं। यह अलग बात है कि पार्टी ने अभी कुछ फाइनल नहीं किया है। वैसे भी गोरखनाथ को वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा के अवधेश प्रसाद ने 12, 923 वोटों से पराजित किया था। इसके बाद हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में भी गोरखनाथ पार्टी प्रत्याशी लल्लू सिंह को इस सीट पर नहीं जीता सके। भाजपा को यहां पर 7,733 मतों से हार का सामना करना पड़ा था। गोरखनाथ वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में 28,076 वोटों से जीतकर पहली बार विधायक चुने गए थे।

कई प्रत्याशियों के नाम आए सामने 

इस बीच गोरखनाथ के अलावा टिकट के दावेदारों के रूप में जो नाम सामने आए हैं, उनमें पूर्व विधायक रामू प्रियदर्शी, नीरज कनौजिया, आरएसएस की पृष्ठभूमि से जुड़े रहे जिला महामंत्री काशीराम रावत, राधेश्याम त्यागी, चंद्रभानु पासवान, लक्ष्मी रावत और जिला पंचायत सदस्य बबलू पासी प्रमुख हैं। इसमें से कई पासी समाज से आते हैं। इस समाज से कई दावेदारों के चलते पार्टी के लिए एक नाम का चयन करना थोड़ा मुश्किल होगा। ऐसे में किसी अन्य बिरादरी से जुड़े चेहरे को भी आजमाया जा सकता है। फिलहाल संगठन ने सभी नामों पर विचार करते हुए दावेदारों की जीत और हार की संभावनाओं को खंगालना शुरू कर दिया है।



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