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खाद्य विभाग के 57 नमूनों की आई रिपोर्ट, 46 मानक पर खरे नहीं उतरे
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। केक खाना भी सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है। झांसी में केक के दो नमूने फेल हो गए हैं। इनमें क्षमता से दोगुना तक खाद्य रंग मिला है। इसके अलावा, खाद्य विभाग की ओर से लिए गए 80 फीसदी नमूने जांच में फेल हो गए हैं।
खाद्य विभाग द्वारा नमूनों को जांच के लिए गोरखपुर स्थित प्रयोगशाला भेजा जाता है। यहां से जांच रिपोर्ट आने में 20 से 30 दिन लगते हैं। हाल ही में खाद्य विभाग की ओर से भेजे गए 57 नमूनों की जांच रिपोर्ट आ गई है। इसमें 46 नमूने फेल हो गए हैं। इसमें सबसे ज्यादा 17 नमूने दूध के फेल मिले हैं। इन सभी में फैट की मात्रा कम पाई गई है। वहीं, दूध से बनी मिठाइयों के 15 नमूने फेल हो गए हैं। इसमें भी फैट की मात्रा कम पाई गई है। खोवा के भी चार नमूने फेल हो गए हैं। इसमें फैट की मात्रा 30 फीसदी होनी चाहिए। जबकि, 22 से 26 फीसदी तक पाई गई है। इसके अलावा, पनीर के सभी चार नमूने मानक पर खरे नहीं उतर पाए हैं। इनमें भी वसा की मात्रा कम मिली है। इसके अलावा बेसन और मसाले के भी दो-दो नमूने फेल हुए हैं। खास बात यह है कि केक के भी दो नमूने फेल हो गए हैं। इसमें रंग की मात्रा 100 पीपीएम तक (पार्ट्स पर मिलियन) होनी चाहिए। जबकि, एक केक में 130 पीपीएम और दूसरे में 200 पीपीएम रंग पाया गया है।
30 दिन बाद दायर कराया जाता है वाद
जिला अभिहित अधिकारी चितरंजन कुमार ने बताया कि जिन लोगों के यहां से लिए गए नमूने फेल हुए हैं, उन्हें नोटिस जारी किया गया है। इसके 30 दिन बाद इनके खिलाफ वाद दायर कराया जाएगा।
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कैंसर तक का हो सकता खतरा : डॉ. गुप्ता
जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. डीएस गुप्ता का कहना है कि क्षमता से दोगुना खाद्य रंग मिलने पर अपच, दस्त लगने से लेकर लिवर तक में दिक्कत आ सकती है। किडनी में भी सूजन आ सकती है। लंबे समय तक सेवन करने पर पैंक्रियाज और लिवर का कैंसर हो सकता है।
