रायबरेली। सलोन क्षेत्र के गांवों में कर्मचारी की आईडी व पासवर्ड से करीब 30 हजार फर्जी जन्म प्रमाणपत्र जारी करने के मामले की जांच उत्तर प्रदेश एंटी टेररिस्ट स्क्वायड (एटीएस) ने शुरू कर दी है। मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा होने के कारण बृहस्पतिवार शाम एटीएस के आईजी और लखनऊ रेंज के आईजी ने सलोन कोतवाली पहुंचकर संदिग्धों से पूछताछ की। मामले में ग्राम विकास अधिकारी समेत चार लोगों पर मुकदमा दर्ज किया गया है।
सलोन कोतवाली क्षेत्र सिरसिरा, लहुरेपुर, नुरुद्दीनपुर, गोपालपुर उर्फ अनंतपुर, गढ़ी इस्लाम नगर आदि गांवों में ग्राम विकास अधिकारी विजय सिंह यादव की यूजर आईडी और पासवर्ड से करीब 30 हजार जन्म प्रमाणपत्र जारी कर दिए गए हैं। खुलासा होने पर एडीओ पंचायत जितेंद्र सिंह की तहरीर पर बुधवार देर रात ग्राम विकास अधिकारी (वीडीओ) विजय सिंह यादव, जनसुविधा केंद्र संचालक (सीएमसी) जीशान खान, सुहैल एवं रियाज खान के खिलाफ सलोन कोतवाली में केस दर्ज कराया गया।
मामला शासन तक पहुंचा तो हड़कंप मच गया। राष्ट्रीय सुरक्षा के खतरे को देखते हुए शासन ने यूपी एटीएस को लगा दिया। बृहस्पतिवार सुबह यूपी एटीएस के अपर पुलिस अधीक्षक आलोक सिंह ने टीम के साथ सलोन पहुंचकर जांच शुरू की। शाम को एटीएस के आईजी नीलाब्जा चौधरी और लखनऊ रेंज के आईजी अमरेंद्र सेंगर भी जांच करने के लिए पहुंच गए।
आईजी के आने के बाद डीएम हर्षिता माथुर, एसपी अभिषेक अग्रवाल व जिले के अन्य अधिकारी भी सलोन पहुंचे। हिरासत में लिए गए आरोपियों विजय सिंह यादव, जनसुविधा केंद्र संचालक (सीएमसी) जीशान खान, सुहैल एवं रियाज खान से पूछताछ की जा रही है। एटीएस के अधिकारियों ने जांच संबंधी जानकारी देेने से इंकार किया।
अपर पुलिस अधीक्षक नवीन कुमार सिंह ने बताया कि एटीएस जांच कर रही है। मामले में सख्त कार्रवाई की जाएगी।
एफआईआर में 19 हजार, जबकि संख्या करीब 30 हजार
सलोन के एडीओ पंचायत ने एफआईआर में 19 हजार 184 फर्जी जन्म प्रमाणपत्र जारी होने की बात कही है, लेकिन 25 से 30 हजार तक फर्जी जन्म प्रमाणपत्र जारी किए जाने की आशंका है। सहायक विकास अधिकारी पंचायत (एडीओ पंचायत) की ओर से सलोन कोतवाली में दर्ज कराई गई एफआईआर में आरोपी वीडीओ विजय सिंह यादव ने इस संबंध में सलोन कोतवाली में लिखकर भी दिया है। हालांकि दूसरे प्रांतों के लोगाें के भी जन्म प्रमाणपत्र जारी किए जाने के कारण देश की सुरक्षा के खतरे को देखते हुए शासन गंभीर है। फर्जी प्रमाणपत्र जारी किए जाने की संख्या बढ़ भी सकती है।
