
सांकेतिक तस्वीर
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तमाम जागरूकता कार्यक्रमों के बावजूद महिलाओं के प्रति हिंसा के मामले थम नहीं रहे हैं। बरेली के वन स्टॉप सेंटर में औसतन हर पांच दिन में एक घरेलू हिंसा की शिकायत पहुंच रही है। बीते वित्तीय वर्ष में 79 मामले दर्ज किए गए हैं। वहीं 8 मार्च 2016 से 31 मार्च 2024 के बीच 1010 मामले पंजीकृत हुए हैं।
कोविड काल में ये मामले कम दर्ज हुए थे। वर्ष 2020-21 से पहले 2019-20 में 197 मामले दर्ज किए गए थे। उससे पहले वर्ष 2018-19 में संख्या 293 तक पहुंच गई थी। हालांकि 2020-21 में 65 मामले ही दर्ज हुए थे। बीते आठ सालों में सबसे कम 49 मामले मार्च 2021 से 31 मार्च 2022 के बीच पंजीकृत हुए थे। केंद्र के अधिकारियों का कहना है कि कोविड काल में लोग शिकायत दर्ज कराने कम आए। इधर, इसके बाद से अब संख्या फिर बढ़ने लगी है।
वर्ष 2022-23 में 59 मामले सामने आए थे। वहीं वर्ष 2023-24 में 79 शिकायतें दर्ज की गईं। विभागीय अधिकारियों के अनुसार घरेलू हिंसा में सबसे अधिक एक-दूसरे पर शक करने के कारण मामले सामने आते हैं। वहीं ससुराल पक्ष की ओर से दहेज के लिए प्रताड़ित करने के सामने आते हैं।
घरेलू हिंसा के मामलों में पहले दोनों पक्षों की काउंसलिंग कराकर रिश्ते को टूटने से बचाने की कोशिश की जाती है। ऐसे मामलों को कोर्ट में दायर कर समाधान निकाला जाता है। इसका सबसे बड़ा नुकसान बच्चों को होता है, जो परिवार में कलेश होते देखते हैं और इससे उनकी परवरिश पर गहरा असर पड़ता है।
