चंद्र ग्रहण के प्रभाव को देखते हुए मंगलवार को शहर के विभिन्न मंदिरों के कपाट बंद रहे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण काल के दौरान मंदिरों में पूजा-अर्चना और दर्शन करना वर्जित माना जाता है।
इसी परंपरा का पालन करते हुए प्रमुख मंदिरों के द्वार श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिए गए। ग्रहण की अवधि के दौरान श्रद्धालुओं ने घरों में ही भजन-कीर्तन और भगवान का स्मरण किया। वहीं कई लोगों ने दान-पुण्य किया।
शहर के विभिन्न इलाकों में लोगों ने अनाज, वस्त्र और धन का दान किया। पंडितों के अनुसार ग्रहण समाप्ति के बाद मंदिरों में गंगाजल से शुद्धिकरण किया गया। इसके उपरांत विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर शाम को मंदिरों के कपाट दोबारा खोले गए।
धार्मिक मान्यता है कि ग्रहण काल में मंत्र जाप, ध्यान और दान का विशेष महत्व होता है। इसी कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने इस दौरान धार्मिक अनुष्ठान किए।
